आरएमएल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीनाक्षी भारद्वाज के अनुसार, उनके यहां अब तक जितने भी कोरोना संक्रमित आ रहे हैं उनमें से 96 फीसदी अति गंभीर अवस्था में होते हैं। चूंकि, केंद्र सरकार का यह अस्पताल सुपर स्पेशियलिटी का दर्जा प्राप्त है। यहां की चिकित्सीय टीम राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व भी करती है।
बावजूद इसके, मरीजों की जान बचाने में डॉक्टर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है दूसरे अस्पतालों से रेफर होना। अस्पताल की प्रवक्ता स्मृति तिवारी का कहना है कि दूसरे अस्पतालों से यहां मरीजों को रेफर किया जा रहा है। आरएमएल पहुंचते-पहुंचते मरीजों का काफी वक्त निकल चुका होता है।
हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली के 11 अस्पतालों में कोरोना मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, जबकि संक्रमितों की मौत इससे ज्यादा अस्पताल में दर्ज की गई हैं। अब तक 73 में सबसे ज्यादा 26 मौत आरएमएल अस्पताल में हुई हैं, जबकि दिल्ली सरकार के अपने लोकनायक में पांच और राजीव गांधी अस्पताल में दो मरीजों की मौत हुई है।
ठीक इसी तरह एम्स के झज्जर और ट्रॉमा सेंटर को मिलाकर दो, सफदरजंग में चार, अपोलो में आठ, मैक्स में पांच, गंगाराम में दो मरीजों की मौत हुई है।
ईडब्ल्यूएस कमेटी के सदस्य और एडवोकेट अशोक अग्रवाल के पास हर दिन कई मरीज उपचार के लिए मदद मांग रहे हैं। कोई कैंसर मरीज है तो कोई किडनी या लिवर का मरीज मदद मांग रहा है। अशोक अग्रवाल भी इन मरीजों के लिए अस्पतालों में फोन लगा रहे हैं, लेकिन आम दिनों में चुनौती रहने वाली स्वास्थ्य सेवाएं अब पूरी तरह से प्रभावित हैं। उनका कहना है कि अस्पतालों में मरीजों को समय पर इलाज मिलना उनका अधिकार है। मरीज को उपचार मिले तो मौत की आशंका को भी कम किया जा सकता है।