सिरी फोर्ट के चिल्ड्रन म्यूजियम में मिली सुरंग
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सीरी फोर्ट की खोदाई में 14वीं शताब्दी की ऐतिहासिक गुप्त सुरंग मिली है। विशेषज्ञ इसे खिलजी काल का मान रहे हैं। पांच से छह फीट की यह सुरंग धनुषाकार है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) सुरंग मिलने पर इसे बड़ी उपलब्धि मान रहा है। उनका कहना है कि इस खोदाई में ओर भी साक्ष्य मिल सकते हैं। इसके लिए विशेषज्ञ की टीम गठित की जाएगी, जो आने वाले दिनों में खोदाई में मदद करेगी। सुरंग के धनुषाकार संरचना का आरंभिक हिस्सा दिखने के बाद फिलहाल खोदाई को रोक दिया गया है। सुरंग को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे इसके लिए बाउंडरी कर संरक्षित किया जा रहा है।
पुरातत्वविदों के अनुसार सीरी किले के आसपास की ऐसी सभी संरचनाएं खिलजी वंश के समय की हैं, जिन्हें 13वीं और 14वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। जानकारी के अनुसार इस किले का निर्माण वर्ष 1303 में हुआ था। यह दुर्ग अलाउद्दीन खिलजी की ओर से मंगोल आक्रमण से बचने के लिए बनाया गया था। सीरी किले के पास स्थित चिल्ड्रन म्यूजियम के परिसर पर एएसआई को यह सुरंग मिली है।
म्यूजियम के गेट को बनाने का कार्य चल रहा है। इसमें खोदाई के समय यह सुरंग सामने आई। एएसआई के अनुसार यहां घूमने आने वाले लोगों की सुविधा के लिए सामने वाले गेट को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए एक अस्थायी मार्ग का निर्माण किया जा रहा था। इसके लिए ही खोदाई की जा रही थी। खोदाई के दौरान ही धनुषाकार संरचना वाली सुरंग का पता चला है। सामने के गेट से मुख्य सड़क तक चार मीटर चौड़ा रास्ता बना रहे थे, जिसके दौरान यह मेहराब जैसी संरचना दिखी है। अधिकारियों को कहना है कि अब इस इलाके में अभी खोदाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ढांचे को इसी तरह से रखा जाएगा। उन्होंने कहा है घूमने आने वाले लोगों के लिए देखने के लिए छोड़ दिया है। अब म्यूजियम घूमने आने वाले लोग इस सुरंग को भी देख सकते हैं।
म्यूजियम को अपग्रेड करने का चल रहा है कार्य
चिल्ड्रन म्यूजियम को वर्ष 2011 में शुरू किया गया था। देश और विदेश के इसमें लोकप्रिय स्मारक और मूर्तियों की लगभग 30 से कृतियां यहां मौजूद हैं। इसमें कई संस्कृतियों की झलक देखने को मिलती है। लोगों में म्यूजियम को लेकर बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसको अपग्रेड किया जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक म्यूजियम में और कृतियां जोड़ी जाएंगी।
खोदाई में सुरंग का एक ही छोर दिखा है। यह काफी लंबी भी हो सकती है। अभी पूरी तरह से खोदाई न होने पर इसके आकार का पता नहीं लगा पाया है। हालांकि, यह औपचारिक खोदाई स्थल नहीं था। यहां रास्ता बनाने के लिए खोदाई की जा रही थी। फिलहाल अभी इसकी खोदाई को रोक दिया है और सुरंग के रूप में दिख रही दीवारों को संरक्षित किया जा रहा है।
-प्रवीण सिंह, दिल्ली सर्कल चीफ, सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट, एएसआई