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दिल्ली की हिंसा में जान गंवाने वालों में 14 लोगों को लगी थी गोली

Sun, 01 Mar 2020 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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demo pic - फोटो : शुभम बंसल
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उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 36 लोगों का पोस्टमार्टम हो चुका है। इससे पता चला है कि 36 में से 22 लोगों की मौत शारीरिक हमले और 14 की गोली लगने से हुई थी।

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जीटीबी अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, गोली से जान गंवाने वालों में अमन, दिनेश, हेडकांस्टेबल रतन लाल, इश्त्याक, मोहम्मद मुबारक हुसैन, मोहम्मद मुदस्सर, प्रवेश, राहुल सोलंकी, शाहिद, वीरभान, मोहम्मद फुरकान, शाद मोहम्मद, प्रवेश, अनवर और नितिन कुमार शामिल हैं। 

उधर, जिन लोगों की मौत शारीरिक हमलों में हुई हैं, उनमें आलोक तिवारी, मोहसिन, सलमान, इंटेलीजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा, अशफाक हुसैन, दिलबर सिंह नेगी, महरुफ अली, मेहताब, जाकिर, दीपक कुमार, राहुल ठाकुर, विनोद, फैजान और सुलेमान शामिल हैं।
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तकनीक से होगी चेहरे पर रुमाल ढके उपद्रवियों की पहचान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा मामले में नकाबपोश दंगाइयों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। एसआईटी को आशंका है कि हिंसा के दौरान इलाके के छुटभैया अपराधियों ने भी माहौल खराब करने में सहयोग दिया है। ऐसे ही कुछ नाम जांच में सामने आए हैं। हिंसा के दौरान उनकी कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। फेस रिकग्निशन तकनीक बड़े अपराधियों की भूमिका की भी पुष्टि करेगी। पुलिस का मानना है कि हिंसाग्रस्त इलाकों में अक्सर वारदात होती हैैं। वहां कई बड़े-छोटे गैंग लंबे वक्त से सक्रिय हैं।

जांच में सामने आया है कि हिंसा फैलाने वाले ज्यादातर लोगों ने नकाब लगा रखे थे। उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी आशंका है। इन्हीं नकाबपोशों ने इलाके में सबसे अधिक तबाही मचाई। पुलिस घटना के वक्त बरामद फुटेज को खंगाल रही है। उनमें दिख रहे चेहरों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन तकनीक की मदद ली जाएगी। इस तकनीक में 2 लाख से अधिक अपराधियों का डाटाबेस है। फुटेज की मदद से डाटाबेस से आधा चेहरा भी मिलान करने पर सामने वाले की पहचान हो सकेगी। 

इसके बाद हिंसा वाले दिन से उसकी कॉल डिटेल से लेकर लोकेशन तक को जोड़कर देखा जाएगा। इस तकनीक का इस्तेमाल जेएनयू हिंसा में भी किया जा चुका है। हालांकि जेएनयू हिंसा में किसी भी नकाबपोश की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस का तर्क है कि फेस रिकग्निशन तकनीक आपराधिक रिकॉर्ड वालों की पहचान कर सकती है।

हिंसाग्रस्त इलाके में बड़े गैंग भी सक्रिय
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इलाके को अपराध के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना aजाता है। इस इलाके में छेनू, नासिर उर्फ खेब्बर गैंग 100 से अधिक आपराधिक वारदात कर चुके हैं। इनके अलावा कई दूसरे छोटे-बड़े गैंग भी हत्या से लेकर दूसरी घटनाओं को अंजाम देते आए हैैं। पुलिस अब इन अपराधियों की हिंसा में संलिप्तता जांचने के लिए उनकी तलाश कर रही है। माना जा रहा है कि हिंसा के बाद से गैंग के लोग भूमिगत हो गए हैं।
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