तत्कालीन तहसीलदार सुरेश चंद्र शर्मा की रिश्तेदार स्वाति दीप शर्मा ने भी इन गांवों में जमीन खरीदकर प्राधिकरण को बेच दी। विभागीय जांच में दोनों के पैसों का लेन-देन की पुष्टि बैंक खाते से हुई है। विभागीय जांच बताती है कि जिन कंपनियों के जरिये जमीन खरीदी गई है उसमें से कई में पीसी गुप्ता का पैसा लगा है। सात गांवों में खरीदी गई जमीन समेकित नहीं है, बल्कि बिखरी हुई है। सभी खसरे एक दूसरे से अलग हैं। अधिकांश गांव के खसरे दूर-दूर हैं। काफी खसरों में आंशिक भाग ही खरीदा गया है। पूरी जमीन ही नहीं खरीदी गई है। समिति ने किसानों को 7 प्रतिशत आबादी भूखंड देने के लिए जो संस्तुति की थी, उस हिसाब से जमीन ही नहीं खरीदी गई।
एफआईआर के मुताबिक इन्होंने खरीदी है जमीन
- संजीव कुमार, गांव धनेरा, बुलंदशहर
- एएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंसलटेंट प्रा. लि. शिप्रा सोसाइटी, इंदिरापुरम, गाजियाबाद
- डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रा. लि. मंडावली, फजलपुर दिल्ली
- हिमालया इंफ्रावेंचर प्रा. लि.
- सतेंद्र चौहान, बिरावती, बुलंदशहर
- इश्त्विा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. द्वारका नई दिल्ली
- मदन पाल सिंह, पीपला, बुलंदशहर
- अजीत कुमार श्रद्धापुरी, मेरठ
- जुगेश कुमार, दुहाई, गाजियाबाद
- धीरेंद्र सिंह चौहान, अर्जुन नगर, आगरा
- निर्दोष चौधरी शास्त्रीनगर, गाजियाबाद
- गौरव कुमार शाहदरा, दिल्ली
- मनोज कुमार, श्रद्धापुरी, मेरठ
- अनिल कुमार डेरा, दिल्ली
- स्वाति दीप शर्मा नजफगढ़ दिल्ली
- स्वदेश गुप्ता, एडब्लूएचओ सोसाइटी, ग्रेटर नोएडा
- सोनाली नई बस्ती, सीतापुर
- शिवा एस्क्रयूस एंड फास्टनर्स प्रा.लि. न्यू राजेंद्रनगर, नई दिल्ली
- रजनीश कारपोरेट सर्विसेज प्रा.लि. आवास विकास कॉलोनी, इटावा