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गजब! 125 किलो की महिला बनी मां

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लगातार कई बार असफल रहने के बाद आखिरकार 38 साल की एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया है। पिछले हफ्ते जन्मे इस बच्चे का वजन 4.27 किलो है।
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दरअसल, इस महिला की सबसे बड़ी समस्या वजन को लेकर थी। 125 किलो की इस महिला ने शादी के लगभग आठ साल बाद बच्चे को जन्म दिया है।

मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बताया कि इस महिला की प्रेगनेंसी काफी जटिल रही है और यह मां बनने की उसकी आखिरी उम्मीद थी।
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'डॉक्टरों ने इलाज से मना किया'

टीओआई के मुताबिक मैक्स हॉ‌स्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर शम्मा कपूर बेदी ने कहा कि प्रीत उन चंद खुशनसीब लोगों में से है जिसने तमाम परेशानियों के बावजूद एक स्वस्‍थ बच्चे को जन्म दिया है।

उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में मोटी महिलाएं गर्भधारण करने से चूक जाती हैं। इसके साथ ही ऐसे मामलों में इन्फेक्‍शन, हाइपरटेंशन और प्रीमैच्योर बेबी के पैदा होने बाद मृत्यु जैसी समस्याएं आती रहती हैं।

प्रीत ने बताया कि इसके पहले उन्होंने बड़े से बड़े डॉक्टर और आईवीएफ सेंटरों से संपर्क किया था लेकिन सभी ने उनके ओवरवेट की वजह से ट्रीटमेंट करने से मना कर दिया था।

पहली बार में हो गया था अबॉर्शन

प्रीत ने बताया कि हर जगह डॉक्टर उनसे एक ही बात कहते थे कि या तो अपना वजन कम कर लो या फिर बच्चे की आस छोड़ दो। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कुछ डॉक्टरों ने उन्हें वजन कम करने की सर्जरी कराने का भी सुझाव दिया था लेकिन यह बहुत लंबा प्रॉसेस है।

प्रीत के मुताबिक वह इतना ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती थीं। इसलिए उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया और आईयूआई कराने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में महिला के यूट्रस में स्पर्म पहुंचाया जाता है ताकि वह गर्भधारण कर सके।

डॉक्टरों ने बताया कि पहले प्रयास में वह फेल हो गईं और उनका अबॉर्शन हो गया लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने एक स्वस्‍थ बच्चे को जन्म दिया।

स्पेशल केस हो सकती हैं प्रीत

डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने लगभग हर दवा का प्रयोग किया जिससे प्रीत गर्भधारण कर सकें और प्रेगनेंसी को बरकरार रख पाएं।

प्रीत को इन्फेशन से बचाने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टरों ने कई दवाइयों का प्रयोग किया। यही नहीं उन्होंने प्रेगनेंसी बरकरार रखने के लिए प्रीत को फॉलिसिल हॉर्मोन की 150 यूनिट दी। जबकि इसकी आम जरूरत सिर्फ 33.5 से 75 के बीच होती है।

डॉक्टरों ने कहा कि मोटी महिलाओं के बीच प्रीत के एक स्पेशल केश हो सकती हैं, जिसने सफलतापूवर्क एक स्वस्‍थ बच्चे को जन्म दिया है।
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ज्यादा मोटापा यानी ज्यादा खतरा

डॉक्टरों के मुताबिक बेरिएट्रिक सर्जरी कराने वाली महिलाओं में सबसे बड़ा कारण मोटापा है। मैक्स इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. प्रदीप चौबे ने बताया कि वेट लॉस सर्जरी से मातृ मृत्यु दर में काफी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि मोटी महिलाओं के लिए एक्सरसाइज और डाइट के माध्यम से वजन कम करना बहुत मुश्किल भरा काम है। खासकर तब जब वह मां बनने की सोचती हैं।

यही नहीं, वजन कम न करना आगे चलकर बच्चा और मां दोनों के लिए खतरनाक साबित होता है। डॉक्‍टर चौबे ने कहा कि शायद यही वजह है कि ज्यादातर महिलाएं अब वेट लॉस सर्जरी को अपना रही हैं।
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