अमन लाल मखीजा की उम्र 40 साल है। वह पाकिस्तान के रहने वाले हैं। इस होली पर शायद ही कोई भारतीय परिवार इतना खुश होगा जितना अमन लाल का परिवार है। असल में होली से ठीक एक हफ्ते पहले अमन लाल जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे और उन्हें मदद की जरूरत थी।
उसी दौरान दिल्ली में सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले लगभग 12 छात्र अचानक देवदूत बनकर सामने आए और कुछ ऐसा किया कि आज न सिर्फ अमन लाल जिंदा हैं बल्कि, एक अच्छी जिंदगी की तरफ बढ़ रहे हैं।
असल में अमन लाल मखीजा का पाकिस्तान में मेडिकल स्टोर है। पिछले तीन साल से वह हेपीटाइटस-बी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी के चलते उन्हें पता चला कि उनका लीवर खराब हो चुका है और अगर जल्द ही इसे बदला नहीं गया तो उनकी जान भी जा सकती है।
सर्जरी के दौरान पड़ी खून की कमी
डाक्टर ने उन्हें सलाह दी कि वह भारत में जाकर अपना इलाज कराएं। अमन लाल सीधे दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल पहुंचे। अमन लाल के भाई उन्हें अपना लीवर देने के लिए तैयार हो गए लेकिन, साल घंटे तक चली इस सर्जरी में काफी खून बह चुका था।
इस तरह की सर्जरी के लिए सामान्य तौर पर अच्छी खासी मात्रा में खून की जरूरत पड़ती है। सर्जरी के दौरान अचानक खून की कमी पड़ गई। अमन लाल का परिवार पाकिस्तान का रहने वाला है।
ऐसे में इनके लिए भारत में तुरंत खून की व्यवस्था करना लगभग असंभव था। उनके भाई दिलशाद ने पर्चीयां छपवाई जिस पर लिखा था कि मेरे भाई को खून की जरूरत है और मदद की आस में अस्पताल के आस-पास बांटना शुरु कर दिया।
होली पर मिला सबसे बड़ा तोहफा
पश्चिमी दिल्ली में सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले कुछ छात्रों की निगाह इस पर्ची पर पड़ी और उन्होंने इस परिवार की मदद करने का फैसला किया।
लगभग 12 छात्रों ने अपना खून दे कर अमन लाल की जान बचा ली। उनके परिवार का कहना है कि हमारे लिए होली के मौके पर इससे बड़ा कोई तोहफा नहीं हो सकता।
अमन लाल पाकिस्तान के जिस इलाके में रहते हैं वहां लगभग दो सौ हिंदू परिवार रहते हैं लेकिन जिस वक्त उन्हें मदद की जरूरत थी उनके पास कोई नहीं था।