हाईकोर्ट ने विधानसभा चुनाव के लिए आवेदन ना कर पाने वाले 11 लोगों की याचिका पर सोमवार को केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। इस याचिका में इन लोगों ने रिटर्निंग अधिकारी पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनका नामांकन पत्र स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट की अन्य पीठ ने 28 जनवरी को इन लोगों की याचिका को खारिज कर दिया था और उसी फैसले को अब चुनौती दी गई है। खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित उपर्युक्त अधिकारियों को 6 फरवरी तक अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल और सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग के रिटर्निंग अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस याचिका में दावा किया गया कि उन्हें आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने से वंचित किया गया। रिटर्निंग अधिकारी ने अरविंद केजरीवाल को कतार में आगे आकर अपने कागजात दिखाने और नामांकन दाखिल करने की अनुमति देने के कारण ऐसा किया गया। ये सभी लोग नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहते हैं।
नामांकन दाखिल ना होने के कारण इन लोगों ने 28 जनवरी को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे जस्टिस संजीव सचदेवा की एकल पीठ ने उसी दिन खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 100 के अनुसार, इस तरह की याचिकाएं हाईकोर्ट के समक्ष नहीं रखी जा सकती हैं और वह भी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले। कोर्ट ने यह भी कहा कि एनपी पोन्नुस्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून वर्तमान मामले पर लागू होता है। हालांकि, एकल पीठ ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।
वहीं सोमवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि वे चुनाव प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे रहे हैं बल्कि वे आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाग लेना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान उन लोगों ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी का, उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से वंचित करने का निर्णय मनमाना, गैरकानूनी और अवैध है।