नए वित्त वर्ष में पीडब्ल्यूडी की कॉरपोरेट पार्टनरशिप योजना को पंख, इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों से हुआ करार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में पैदल यात्रियों की राह अब आसान और सुरक्षित होने जा रही है। एक अप्रैल से शुरू होने जा रहे नए वित्त वर्ष (2026-27) में दिल्ली सरकार ने फुटओवरब्रिज (एफओबी) की सूरत बदलने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। योजना के तहत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत आने वाले 100 से अधिक पुराने फुटओवर ब्रिज के रखरखाव और सुंदरीकरण के लिए निजी एजेंसियों को गोद दिया जाएगा।
सरकार की नई रणनीति के अनुसार, इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों के साथ करार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस नीति के तहत, निजी फर्मों को इन फुटओवर ब्रिज की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुंदरीकरण की जिम्मेदारी संभालनी होगी। इसके बदले में सरकार इन कंपनियों को संबंधित एफओबी पर विज्ञापन लगाने के अधिकार देगी। इससे न केवल सरकार के खजाने पर रखरखाव का बोझ कम होगा, बल्कि विज्ञापन के जरिए राजस्व में भी इजाफा होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह नो-प्रॉफिट नो-लॉस मॉडल दिल्ली के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने में मदद करेगा।
सरकार ने पुराने ढांचों को सुधारने के साथ-साथ आठ नए स्थानों पर एफओबी निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इनमें मधुबन चौक, वेलकम-कट (जीटी रोड), शाहबाद डेयरी, बेर सराय मार्केट, लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, ओखला सब्जी मंडी, जनकपुरी जीवन पार्क बस स्टैंड और माता चानन देवी अस्पताल शामिल हैं। हाल ही में हुई एफओबी-सबवे कमेटी की बैठक में इन परियोजनाओं के रास्ते में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर कर लिया गया है।
सांसदों और विधायकों ने भी सौंपे प्रस्ताव : दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से नए फुटओवर ब्रिज की मांग बढ़ी है। पूर्वी दिल्ली से सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने अपने क्षेत्र में 4 और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने एक स्थान पर एफओबी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा त्रिलोकपुरी (4 स्थान), महरौली (10 स्थान), बवाना (8 स्थान) और नरेला (6 स्थान) सहित पूरी दिल्ली से दर्जनों प्रस्ताव सरकार को मिले हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में इन सभी प्रस्तावों पर व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जाएगी।