हाईकोर्ट ने यमुना नदी को स्वच्छ रखने के लिए डीपीसीसी को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को निर्देश दिया कि वह जीटी करनाल रोड इंडस्ट्रियल एरिया में सभी औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करे। इसके लिए 50 तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ दिल्ली सरकार द्वारा 50 अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा।
निरीक्षण में उद्योगों के नाम, गतिविधियों, सीवेज सिस्टम और अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (ईटीपी/सीईटीपी) की स्थिति की जांच शामिल होगी। निरीक्षण की निगरानी स्थानीय आयुक्तों (विवेक कुमार टंडन, वृंदा भंडारी, प्रवीण गुप्ता, अरविंद सह) की देखरेख में होगी। इसकी रिपोर्ट 29 अक्तूबर को पेश होगी।
डीपीसीसी ने 17 सितंबर को हलफनामा दाखिल किया। उसमें दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी दी गई थी। हलफनामे के अनुसार, दिल्ली में 28 स्वीकृत औद्योगिक क्षेत्र हैं, जहां कुल 24,169 इकाइयां हैं। इनमें से 981 इकाइयों में जल प्रदूषणकारी गतिविधियां हैं और ईटीपी लगे हैं। 28 में से 17 क्षेत्र 13 सीईटीप से जुड़े हैं, जहां 21,819 इकाइयां हैं और 865 में ईटीपी हैं। शेष 11 क्षेत्रों में सीईटीपी नहीं हैं, जहां 2,350 इकाइयां हैं और 116 में ईटीपी हैं।
हलफनामे में कहा गया कि 28 स्वीकृत क्षेत्रों के अलावा 27 पुनर्विकास क्षेत्र हैं, जहां कुल 6,503 इकाइयां हैं और 53 में ईटीपी हैं। इन क्षेत्रों में सीवर, ड्रेनेज और स्टॉर्म वाटर ड्रेन जैसी सुविधाएं अपर्याप्त हैं।
डीएसआईआईडीसी और डीपीसीसी के हलफनामे में अंतर
डीएसआईआईडीसी ने भी 19 सितंबर को हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। इसमें कहा गया कि 13 सीईटीपी में से 2 (बवाना और नरेला) उनके नियंत्रण में हैं। बवाना में कुल 16,312 प्लॉट्स हैं, जिनमें 16,007 सीवर नेटवर्क से जुड़े हैं, लेकिन डीपीसीसी के अनुसार 8,875 इकाइयां हैं। नरेला में 3,376 प्लॉट्स और 3,222 कनेक्शन हैं, जबकि डीपीसीसी के अनुसार 3,120 इकाइयां। कोर्ट ने दोनों हलफनामों में अंतर पाने पर दोनों को संयुक्त रूप से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। कोर्ट ने आईडीएमसी के विशेष सचिव संदीप मिश्रा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया, जो दिल्ली सरकार की ओर से सभी विभागों का समन्वय करेंगे।