विशेष पॉक्सो अदालत-1 के न्यायाधीश विकास नागर की अदालत ने 16 वर्षीय नाबालिग के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में बेलदारपुरा तारागंज थाना जनकगंज ग्वालियर मध्यप्रदेश के निवासी नरेंद्र कुमार शाक्य को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही 70 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला चार सितंबर 2017 का है, जब 16 वर्षीय पीड़िता स्कूल से घर लौट रही थी। गेट नंबर 1 पर पहुंचने पर आरोपी ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। पीड़िता के चाचा ने 13 सितंबर 2017 को कासना कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने आईपीसी की धारा-363, 366, 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज किया। जांच अधिकारी एसआई ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़िता का बयान दर्ज किया। आरोपी को गिरफ्तार कर उसका बयान लिया गया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और धारा 164 सीआरपीसी के तहत उसका बयान दर्ज किया गया।
जांच पूरी होने के बाद 20 दिसंबर 2017 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो ने सभी गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील बृजेश कुमार शास्त्री ने कहा कि दोषी अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है और बेहद गरीब है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वहीं विशेष लोक अभियोजक जय प्रकाश भाटी ने कहा कि दोषी ने नाबालिग के साथ अपहरण और दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध किया है, इसलिए उसे कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि नाबालिग के साथ यौन हिंसा समाज के लिए कलंक है। आरोपी ने न सिर्फ पीड़िता का बचपन छीना, बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाया। ऐसे मामलों में दोषियों को न्यूनतम रियायत नहीं दी जानी चाहिए। इस कारण आरोपी को 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। 70 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया। जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता के पुनर्वास पर खर्च की जाएगी।