साइबर सेल व द्वारका नार्थ थाना पुलिस टीम ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि पीड़ित के खाते से निकाले गए रुपये चार अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। पुलिस ने इन सभी खातों की जानकारी हासिल की। इसमें पता चला कि ये खाते दिल्ली, झारखंड और पश्चिम बंगाल के हैं। पुलिस ने खाताधारकों के पैन और आधार नंबर लेकर जांच की।
साथ ही आरोपियों के नंबर का रिकार्ड भी खंगाला। काफी विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने तकनीकी आधार पर मदनपुर खादर और करोलबाग में छापामारी कर मनोज यादव को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने दूसरे आरोपी अलीमुददीन अंसारी को राजस्थान के अजमेर से गिरफ्तार कर लिया।
कई राज्यों में फैला है गैंग
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गैंग में सौ से ज्यादा सदस्य हैं और वे कई राज्यों में फैले हैं। गैंग के झारखंड के जामतारा, गिरीडीह, देवघर, धनबाद और पश्चिम बंगाल के वर्धमान में कॉल सेंटर हैं। जिसमें कार्यरत आरोपी लोगों से उनकी बैंक खातों व क्रेडिट व डेबिट कार्ड की जानकारी लेकर उन्हें ठगी का शिकार बनाते हैं।
मनोज यादव फर्जी कागजात पर बैंक खातों का इंतजाम करता है। वह गरीब और श्रमिक को आत्मीयता दिखाकर उनके पहचान पत्र लेता है और फिर उनके आधार पर फर्जी पता अंकित करवाता है। जिसके जरिए बैंक खाता खुलवाता है। इसके एवज में गरीबों को दो हजार रुपये देता है। इसके एवज में गैंग का सरगना मनोज को हर खाते पर 12 हजार रुपये देता है। जांच में पता चला है कि गैंग के सदस्य इन खातों में करीब 10 करोड़ रुपये की लेन-देन कर चुके हैं। आरोपियों ने खुलासा किया है कि अब तक करीब एक हजार लोगों से ठगी कर चुके हैं।