इस्लाम मजहब में जकात (दान) की बड़ी अहमियत है। जकात रोजे की ताकत है। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया कि रोजा रखते हुए शख्स को बुरी बात कहने से बचना चाहिए। यह भी जकात है। जकात, दोस्ती का दस्तावेज तो है ही रोजे का जेवर भी है।
जकात का जेवर रोजे की जैब-ओ-जीनत (गौरव-गरिमा) बढ़ाता है। मुफ्ती-ए-आजम सलीम अहमद ने बताया कि जिस शख्स के पास 612 ग्राम (साढ़े बावन तोला) चांदी के बराबर सोना, चांदी, नगदी या इससे ज्यादा हो और उसको उसके पास एक साल गुजर गया हो। तो उसके ऊपर जकात फर्ज हो जाती है।
जकात में माल का 40वां हिस्सा यानि 2.5 प्रतिशत गरीबों, बेवाओं, यतीम बच्चों को देना होता है। बताया कि जकात वैसे तो किसी भी महीने में दी जा सकती है। लेकिन रमजान में हर नेकी का सत्तर गुना सवाब मिलता है। उनका कहना है कि जकात में दिखावा नहीं होना चाहिए। दिखावा (आडंबर) शैतानियत का निशान है, इंसानियत की पहचान नहीं।
अन्य मजहबों में भी जकात की जिक्र
जकात का जिक्र हर मजहब में है। मिसाल के तौर पर जैन धर्म में जिस अपरिग्रह (जरूरत से ज्यादा धन, वस्तुएं अपने पास नहीं रखना) की बात की गई है उसकी बुनियाद में जकात ही तो है यानी संग्रह मत करो और जरूरतमंदों को बांट दो। इसी तरह सनातन धर्म में भी त्याग करते हुए उपभोग (तेन व्यक्तेन भुंजीथ:) की बात कही गई है। यह त्याग दरअसल जकात की ही तो पैरवी है। बाइबल में भी कहा गया है कि फ्रीली यू हेव रिसीव्ड /फ्रीली यू गिव यानी तुम्हें खूब मिला है। तुम ख़ूब दो (दान करो)
जकात से जुड़े पाठकों के सवाल और मुफ्ती के जवाब
मुफ्ती सलीम
- फोटो : अमरउजाला
जकात के बारे में लोगों की तमाम उलझनों को सुलझाने के लिए अमर उजाला संवाददाता ने मुफ्ती सलीम से तफ्सीर से बात की। पेश है उनसे किए गए सवाल और उनके जवाब।
सवाल- जकात के मायने क्या हैं ?
जवाब- गरीबों का मालदारों पर हक है जो साहिब ए निसाब होने पर अदा करना फर्ज है।
सवाल - जकात कब वाजिब होती है.?
जवाब - निसाब (माल) पर क़मरी (उर्दू) साल गुजर जाये तो जकात वाजिब होती है
सवाल-कितना सोना हो तो जकात फर्ज होती है?
जवाब- साढे सात तोला या उस से ज्यादा
सवाल-कितनी चांदी हो तो जकात फर्ज होती है ?
जवाब- साढ़े बावन तोले या उससे अधिक
सवाल - कितने रुपये हो तो जकात फर्ज होती है
जवाब- साढ़े बावन तोले चांदी की कीमत के बराबर हो तो जकात फर्ज होती है
सवाल - इस्तेमाल वाले जेवरात पर जकात है या नही ?
जवाब - जी हां है
सवाल - जकात अंग्रेजी महीने के हिसाब से निकाली जाये या कमरी (इस्लामिक कैलेंडर)?
जवाब - कमरी (इस्लामिक) महीने के हिसाब से
सवाल - बेचने की नीयत से खरीदे गए प्लॉट पर जकात वाजिब होगी ?
जवाब - जी हां वाजिब होगी
सवाल - प्लॉट खरीदते वक्त बेचने की नीयत नहीं थी, बाद मे बेचने का इरादा हुआ, तो उस पर जकात वाजिब होगी या नही ?
जवाब - जब बिक जाये तो वाजिब होगी
सवाल - जो प्लॉट मकान बनाने के लिये खरीदा गया हो उस पर जकात है या नही ?
जवाब - जी नहीं
सवाल -जो मकान किराए पर दिया उसकी जकात का क्या हुक्म है ?
जवाब - उसका किराया निसाब को पहुंचे तो उसकी जकात वाजिब होगी
सवाल - किसी को बताये बगैर उसे जकात दें तो जकात अदा होगी या नही ?
जवाब - अदा हो जायेगी
सवाल- मुलाजिम (नौकर) ने इजाफी तनख्वाह मांगी, मालिक ने जकात की नीयत से इजाफा किया तो क्या मालिक की जकात अदा होगी ?
जवाब - जकात अदा न होगी
सवाल - इनकम टैक्स देने से जकात अदा होगी ?
जवाब - जी नहीं
सवाल - क्या अपने मां बाप, बेटा बेटी को या शोहर बीवी एक दूसरे को जकात दे सकते हैं ?
जकात - जी नहीं
सवाल - साहिबे निसाब को जकात देने से जकात अदा होगी ?
जवाब - नहीं
सवाल - भाई बहन चचा भतीजे मामा भांजे खाला को जकात देना कैसा ?
जवाब - जाइज व बेहतर
सवाल - मालदार बीवी का शोहर दूसरे से जकात ले सकता है या नही?
जवाब - ले सकता है
सवाल - दीनी मदरसों मे जकात देना जाइज है या नही?
जवाब - जाइज व बेहतर है
सवाल - साहिबे निसाब (मालदार) लोग खुद को मोहताज जाहिर करके जकात वसूलते हैं उन पर क्या हुक्म है ?
जवाब - उनको जकात लेना हराम है
सवाल- बारिश के पानी से सैराब (सिंचित) जमीन की पैदावार पर कितना हिस्सा अल्लाह की राह मे देना वाजिब है ?
इसी तरह खूद सैराब की हुई जमीन की पैदावार पर कितना कितना हिस्सा वाजिब है ?
जवाब - बारिश के पानी से पैदावार पर दसवां हिस्सा. और खुद सैराब की गई जमीन की पैदावार पर बीसवां हिस्सा
सवाल - हाजते असलिया किसे कहते हैं.?
जवाब - रिहाइशी मकान, पहनने के कपडे, घर का जरूरी सामान, खाने पीने की अशिया, सवारी, आलिम की किताबें
सवाल-अगर किसी शख्स का किसी फक़ीर (गरीब) पर कर्ज हो और वो उसे जकात की नीयत से माफ कर दे तो जकात अदा होगी या नही ?
जवाब - जी नहीं
सवाल - सोना चांदी की जकात मे सोना चांदी का टुकड़ा ही देना होगा या उसकी रकम?
जवाब - इख्तियार है
सवाल - मसारिफे जकात मे फकीर किसे कहते हैं?
जवाब - वो शख्स जो निसाब से कम का मालिक हो.
सवाल - मसारिफे जकात में मिस्कीन किसे कहते हैं?
जवाब - जो बिल्कुल किसी चीज का मालिक न हो
सवाल - मसारिफे जकात मे मकरूज किसे कहते है?
जवाब - जिसके जिम्मे कर्ज हो. कर्ज की अदायगी के बाद निसाबे कामिल का मालिक न रहता हो
सवाल - मुसाफिर पर जकात की कितनी रकम खर्च की जाये ?
जवाब - इतनी रकम की वो अपने वतन आसानी से पहुंच जाये
सवाल - मस्जिद या मदरसा की तामीर, रासता या पुल की तामीर मे जकात दे सकते हैं या नहीं ?
जवाब - नहीं दे सकते
सवाल - मैयत (मृतक) को कफनाने या मैयत का कर्ज चुकाने मे जकात की रकम सर्फ (खर्च) करना जाइज है या नहीं ?
जवाब - जाइज नहीं है।
सवाल - जकात की रकम रिश्तेदारों, पड़ोसियों पर सर्फ करना कैसा ?
जवाब - जाइज व बेहतर है
सवाल - एक ही शख्स को पूरी जकात देना कैसा ?
जवाब - मकरूह है (दुरुस्त नहीं है)
सवाल - जो जमीन तिजारत के लिये ली जाती है क्या उस पर जकात फर्ज है ?
जवाब - जी हां
सवाल - क्या मदरसे के मोहतमिम या नाजिमे आला वगैरा (जो तलबा के वकील होते हैं उन) को जकात दे सकते है ?
जवाब - हां दे सकते हैं
सवाल - सोने की जकात खरीदते वक्त की कीमत के हिसाब से होगी या मौजूदा कीमत.?
जवाब - जिस कीमत से गरीब को ज्यादा फायदा पहुंचे
सवाल - क्या ना बालिग बेटा या बेटी के माल पर भी जकात फर्ज है ?
जवाब - नहीं
सवाल - मस्जिद के इमाम या मुअज्ज़िन की तनख्वाह जकात से दी जा सकती है ?
जवाब - नहीं
सवाल - क्या लड़की जकात की रकम अपने वालिदैन को दे सकती है ?
जवाब - नहीं
रमजान के पवित्र महीने में रोजे के संबंध में आपके जेहन में कोई जिज्ञासा है तो हमसे साझा कर सकते हैं। आपके चुनिंदा सवालों के जवाब उलेमा से पूछकर अमर उजाला में प्रकाशित किए जाएंगेे। इसके अलावा रमजान के महीने में किसी भी कार्यक्रम के बारे में भी सूचना दे सकते है। सवाल पूछने के लिए आप 9756327828 पर दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक कॉल सकते हैं, इसके अलावा आप chandm@ddn.amarujala.com पर मेल भी कर सकते हैं।