migration in uttarakhand
10 सालों के भीतर इस आयु वर्ग के 42.25 प्रतिशत युवाओं ने पलायन किया। जबकि 25 साल से कम आयु वर्ग में 28.66 प्रतिशत व 35 साल से अधिक आयु वर्ग में 29.09 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार एवं आजीविका के लिए पलायन कर दूसरे शहरों में रह रहे हैं। युवाओं का पलायन रोकना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
पर्वतीय जिलों में नहीं है रोजगार का विकल्प
प्रदेश के पर्वतीय जिलों में सरकारी नौकरी के अलावा रोजगार व आजीविका के संसाधन न होने के कारण युवाओं को गांव छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में पलायन करना पड़ रहा है। राज्य के मैदानी जिले हरिद्वार, देहरादून व ऊधमसिंह नगर तक ही औद्योगिक विकास हुआ है। पहाड़ों में न तो औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिला और न ही स्वरोजगार के लिए युवा आर्थिक रूप से मजबूत हैं। जिसकी वजह से गांवों से युवाओं से सबसे ज्यादा पलायन किया।
प्रदेश में करीब नौ लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत
उत्तराखंड राज्य में बेरोजगारों का आंकड़ा करीब नौ लाख तक पहुंच गया है। 13 जिलों में 531174 पुरुष बेरोजगार व 338588 महिला बेरोजगार पंजीकृत हैं। जिसमें स्नातक पुरुष बेरोजगार 108248, महिला स्नातक 111521 शामिल हैं। हर साल बेरोजगारी का आंकड़ा बढ़ रहा है।