एक तरफ इंटरनेशल सेमिनार चल रहा है तो दूसरी ओर एम्स की दीवारें, शौचालय और फाउंटेन पार्क व्यवस्था की कहानी बयां कर रहे हैं। चिकित्सा संस्थान होने के नाते सफाई और संसाधनों के प्रबंधन का जो सलीका होना चाहिए वो सब फेल दिखा।
तृतीय तल स्थित शौचालय शीट पर पान की पीक, वॉशरूम कूड़ाघर और टूटी कुर्सियों का कबाड़खाना जैसा दिखा। परिसर के बीचोबीच लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए फाउंटेन पार्क में पानी जमा है।
गंदे पानी के कारण अस्पताल में ही डेंगू संक्रमण का खतरा बना हुआ है। एम्स की दीवारें करोड़ों खर्च के बावजूद उखड़ गई हैं, जो घटिया निर्माण की कहानी बयां कर रही हैं। इन अव्यवस्थाओं को लेकर एम्स प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन वार्ता नहीं हो पाई। एम्स की ओर से पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।