जूनियर मास्टर शेफ का पहला ही खिताब देहरादून के सार्थक ने जीता। प्रेमनगर निवासी 11 वर्षीय सार्थक के पिता नहीं हैं। ऐसे में घर चलाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए उसने अपने मैगी प्वाइंट की जिम्मेदारी संभाली।
साथ ही जूनियर मास्टर शेफ के ऑडीशन दिए। सभी पड़ाव पार किए। तैयारी के साथ पहुंचे सार्थक ने आखिरकार सार्थक ने जजेस का दिल जीता और जूनियर मास्टर शेफ का खिताब जीत देश ही नहीं विदेशों में भी अपना नाम किया।
क्रिकेट में बिखरी अभिमन्यु की चमक
दून के युवा और उदीयमान क्रिकेटर ई अभिमन्यु ने अपने खेल से राष्ट्रीय स्तर पर अपना अलग मुकाम बना लिया है। जूनियर इंटर जोनल क्रिकेट टूर्नामेंट में और उत्तर प्रदेश के खिलाफ कोच बेहर इलाइट अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट में अभिमन्यु इस साल शतक लगा चुके हैं।
मात्र18 साल की उम्र में बंगाल रणजी टीम में शामिल होकर रणजी कैरियर की शुरुआत करने वाले अभिमन्यु का संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले अंडर-19 वर्ल्ड कप के संभावितों में चयन किया गया है।
बेस्ट रेफरी ऑफ द ईयर रहे प्रताप
उत्तराखंड के फुटबॉल रेफरी प्रताप सिंह पटवाल के बेदाग निर्णयों को ऑल इंडिया फुटबाल एसोसिएशन ने भी सलाम किया। साल 2012-13 के लिए प्रेमनगर निवासी प्रताप पटवाल को एआईएफएफ ने बेस्ट रेफरी ऑफ द ईयर का पुरस्कार दिया।
प्रताप अभी तक करीब 300 राष्ट्रीय स्तर और 75 अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैचों में रेफरी की भूमिका निभा चुके हैं।
ताशी-नुंग्शी ने रचा इतिहास
19 मई 2013 की सुबह 7:40 पर एक ऐसी खबर आई, जिसने दून का माथा गर्व से ऊंचा कर दिया। जोहड़ी गांव के निवासी 21 वर्षीय जुड़वां बहन ताशी मलिक और नुंग्शी मलिक ने एवरेस्ट फतह कर नया इतिहास रच दिया।
दोनों बेटियों का सपना दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों पर फतह करने का है, जिसमें वह कामयाब भी हो रही हैं।
छाई रहीं होनहार भुवन्या विजय
17 मई 2013 को आई एक खबर ने दून की एक बेटी को देश के फलक पर मशहूर कर दिया। सेंट जोजेफ्स एकेडमी की छात्रा भुवन्या विजय ने आईएससी 12वीं के नतीजों में देशभर में अपना नाम कमाया।
उन्होंने 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर इतिहास रच दिया। बिना कोचिंग के इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने वाली भुवन्या से हर कोई प्रेरणा ले रहा है।