परिवर्तन की हवा सियासी दलों से बहकर सत्तालोक तक पहुंची और वहां से राजभवन में राज्यपाल बेबीरानी मौर्य की विदाई की पटकथा लिख गई। साथ ही फौजी अफसर रहे ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने नए राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।
दलबदल में घुली परिवर्तन की बयार
देखते ही देखते परिवर्तन की यह बयार अनायास दलबदल में घुल गई। मिशन 2022 के लक्ष्य को साधने के लिए भाजपा ने कांग्रेस के पुरोला विधायक राजकुमार, धनोल्टी के निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार और भीमताल के निर्दलीय विधायक रामसिंह कैड़ा को पार्टी में शामिल कराकर कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। कांग्रेस ने भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे की घर वापसी कराकर करारा जवाब दिया।
एक साल में चार विधायकों को खोने का गम
साल भर की इन सियासी उलटबासियों के बीच उदास करने वाली खबरें भी आई। एक साल में चार विधायकों के देहावसान ने राजनीति को रुआंसा कर दिया। कांग्रेस की दिग्गज नेता इंदिरा हृदयेश, संभावनाओं से भरपूर भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना, गंगोत्री के विधायक गोपाल रावत और अंत में सबसे वरिष्ठ विधायक हरबंस कपूर दुनिया से विदा हो गए।
..और उत्तराखंड बना सियासी सूरमाओं का अखाड़ा
साल के आखिर तक उत्तराखंड सियासी सूरमाओं का अखाड़ा बन गया। भाजपा की चुनावी बिसात बिछाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह सरीखे दिग्गज नेता आए तो कांग्रेस भी पीछे नहीं रही। विपक्षी दल ने राहुल गांधी को मैदान में उतारा। उधर, तीसरे विकल्प के लिए खम ठोक रही आम आदमी पार्टी की हवा बनाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी अपनी लोकलुभावन घोषणाओं से सियासत गरमाते दिखे।