मानसून की धमक के साथ ही यमुनोत्री धाम को लेकर तीर्थ पुरोहितों की चिंता बढ़ने लगी है। जून 2013 की आपदा के बाद भूवैज्ञानिकों के सर्वे में खतरा बताए जाने पर भी सरकार ने यहां कोई सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराए। यमुनोत्री मंदिर पर कालिंदी पर्वत से भूस्खलन तथा नीचे यमुना नदी से कटाव का खतरा मंडरा रहा है।
बारिश शुरू होने के साथ ही यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। यहां यमुनोत्री मंदिर पर ऊपर से कालिंदी भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है, तो नीचे यमुना नदी का कटाव चिंता का कारण बना हुआ है।
धाम में सुरक्षित स्नान के लिए घाट तक नहीं बनाए गए हैं। यमुना नदी में बीते सालों की बाढ़ का मलबा जस का तस जमा है। इस हाल में देश-विदेश से यहां आ रहे तीर्थयात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं, तो मंदिर और धाम पर खतरा भी मंडरा रहा है।