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खतरे में यमुनोत्री, भूस्खलन और कटाव की चपेट में आया धाम

Thu, 25 Jun 2015 09:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बड़कोट (उत्तरकाशी)
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मानसून की धमक के साथ ही यमुनोत्री धाम को लेकर तीर्थ पुरोहितों की चिंता बढ़ने लगी है। जून 2013 की आपदा के बाद भूवैज्ञानिकों के सर्वे में खतरा बताए जाने पर भी सरकार ने यहां कोई सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराए। यमुनोत्री मंदिर पर कालिंदी पर्वत से भूस्खलन तथा नीचे यमुना नदी से कटाव का खतरा मंडरा रहा है।
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बारिश शुरू होने के साथ ही यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। यहां यमुनोत्री मंदिर पर ऊपर से कालिंदी भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है, तो नीचे यमुना नदी का कटाव चिंता का कारण बना हुआ है।

धाम में सुरक्षित स्नान के लिए घाट तक नहीं बनाए गए हैं। यमुना नदी में बीते सालों की बाढ़ का मलबा जस का तस जमा है। इस हाल में देश-विदेश से यहां आ रहे तीर्थयात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं, तो मंदिर और धाम पर खतरा भी मंडरा रहा है।
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हरीश रावत ने घोषणा की पर बजट नहीं

यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पवन प्रकाश उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल, मनमोहन, प्रदीप आदि तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि जून 2013 की बाढ़ के बाद भूवैज्ञानिकों ने यमुनोत्री धाम का सर्वे किया था। उन्होंने यहां सुरक्षात्मक कार्य कराए जाने की जरूरत बताई थी।

दो साल बीतने पर भी इस दिशा में कोई प्रयास नहीं हुआ। इस बार कपाट खुलने के मौके पर खरसाली पहुंचे सीएम हरीश रावत ने भी यमुनोत्री धाम के विकास की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इसके लिए भी एक धेले के बजट की स्वीकृति नहीं मिली है।

अब बरसात शुरू होने से धाम पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने चार धाम यात्रा के प्रथम तीर्थ यमुनोत्री के प्रति सरकार के उपेक्षित रवैये पर नाराजगी जताई।
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