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गंगा से भी ज्यादा मुश्किल है यमुना की सफाई, जानिए कितनी

Sat, 14 Nov 2015 12:05 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
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केंद्र सरकार ने नमामि गंगे की तर्ज पर यमुना की सफाई का अभियान ‘नमामि यमुने’ तीन साल में पूरा करने के लिए कहा है, लेकिन नमामि गंगे की तुलना में इस अभियान की राह अधिक मुश्किल है। श्री यमुनोत्री मंदिर समिति की मानें तो यमुना में गंगा से चार गुना से अधिक सीवर, होटलों, आश्रमों और घरों की गंदगी मिल रही है।
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सच्चाई यह है कि पूरा सिस्टम अभी तक गंगा की सफाई में उलझा रहा और लगातार मैली हो रही यमुना पर किसी सरकारी एजेंसी ने ध्यान ही नहीं दिया। गंगा पर कई दशकों से काम चल रहा है और बेहिसाब खर्च हो चुका है।

ऐसे में गंगा से कई गुना ज्यादा मैला ढो रही यमुना को साफ करने के लिए शुरू हुई कोशिश में भी कई गुना अधिक तेजी की जरूरत है, जो अभी नजर नहीं आ रही है। इधर, केंद्र सरकार के निर्देश पर वन अनुसंधान संस्थान नमामि यमुने प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने की तैयारी कर रहा है। यह काम जनवरी 2016 में शुरू होने की उम्मीद है।
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केंद्र सरकार की घोषणा और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के यमुना आरती से नमामि यमुने मुहिम ने गति पकड़ ली है। दावे तो तीन से पांच साल में यमुना को स्वच्छ करने के हैं, लेकिन, श्री यमुनोत्री समिति का कहना है कि इसमें अनुमान से कहीं ज्यादा समय लग सकता है।

जनवरी से शुरू होगा नमामि यमुने की डीपीआर पर काम

समिति के अनुसार यमुनोत्री से ही नदी में गंदगी और सीवर का प्रवाह शुरू हो जाता है जो विकासनगर पार करते-करते बहुत बढ़ जाता है। हरियाणा से यूपी आगरा और इलाहाबाद पहुंचते-पहुंचते गंदगी और बढ़ जाती है। समिति के उपाध्यक्ष पवन उनियाल का कहना है कि यमुना के लिए पहले कोई कार्ययोजना बनी ही नहीं।

यही कारण है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य सरकारी एजेंसियों ने यमुना में गंदगी रोकने पर ज्यादा ध्यान दिया ही नहीं। इन एजेंसियों का अधिक जोर गंगा पर ही रहा है। उनियाल का कहना है कि वर्ष 1987-88 में राजीव गांधी सरकार ने 500 करोड़ की योजना बनाई थी जो हरियाणा और यूपी में सिमट कर रह गई।

इसमें से सिर्फ 250 करोड़ ही खर्च हुआ था, फिर क्या हुआ पता नहीं। अब स्थिति बेकाबू हो जाने के बाद केंद्र के बाद दिल्ली सरकार भी हरकत में आई है। समिति ने नए सिरे से यमुना घाटों को चिन्हित करने के साथ मास्टर प्लान यमुनोत्री से बनाने की मांग की है।
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यमुना के सफर पर एक नजर

-यमुना उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और यूपी में बहती है। इलाहाबाद में गंगा से संगम होता है
-उत्तराखंड से इलाहाबाद तक यमुना में डेढ़ सौ घाट हैं
-यमुना आरती बटेश्वरधाम और मथुरा में होती रही। इस साल से विकासनगर और दिल्ली में शुरू हुई
-यमुना बेसिन के संबंध में बहुत कम विज्ञानियों ने शोध किए हैं

जल्द बनेगी यमुना पर रिपोर्ट
केंद्र सरकार से यमुना की डीपीआर के संबंध में पत्र आया है। नमामि गंगे की डीपीआर सौंपने के बाद यमुना पर काम शुरू होगा। नमामि गंगे से यमुना का भी होमवर्क हो गया है। यमुना की रिपोर्ट जल्दी बन जाएगी।
- डॉ. सविता, निदेशक वन अनुसंधान संस्थान
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