20 साल पहले देहरादून के डीएवी कालेज परिसर में हुई छात्र नेता आलोक चांदना की हत्या में उम्र कैद की सजा काट रहा हत्यारोपी सौरभ बोहरा अधिकारियों को गुमराह कर पैरोल पर है।
उसकी मां मंजू की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद उसे बीमार दिखाकर वह नौ अक्टूबर 2015 से बाहर घूम रहा है। सत्ता और शासन में ऊंची पहुंच के चलते उसकी पैरोल की अवधि भी लगातार दो बार दो-दो महीने के लिए बढ़ाई जा चुकी है।
डीएवी कालेज परिसर में 24 सितंबर 1996 को छात्र संघ चुनाव विवाद में छात्र नेता आलोक चांदना की चाकू, खुखरी और डंडों से वार कर हत्या कर दी गई थी। मामले में 30 मई 2000 को देहरादून जिला अदालत ने हत्यारोपियों सौरभ, नितिन, धीरज कालरा, भगत सिंह, सोम प्रकाश, ऋषि और संजीव को उम्र कैद की सजा सुनाई।
पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील के बावजूद दोषियों को राहत नहीं मिली। सजा को अप्रैल 2011 में हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। तभी से सभी दोषी दून जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, लेकिन सत्ता और शासन में ऊंची पहुंच के चलते हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहा सौरभ बोहरा निवासी हरिद्वार रोड मृतक मां को बीमार दर्शाकर पैरोल पर घूम रहा है।
उसकी मां मंजू बोहरा की सिटी हार्ट सेंटर में आठ अक्टूबर 2015 की रात दस बजे मौत हो गई थी। जबकि सौरभ को मां की बीमारी पर नौ अक्तूबर 2015 को एक महीने की पैरोल दी गई। सात नवंबर 2015 को उसकी पैरोल दो महीने और आठ जनवरी 2016 को एक बार फिर दो महीने मां की बीमारी के चलते बढ़ाई गई।