किताब लिखकर रॉयल्टी कमाने वाले लेखकों पर अब टैक्स की मार पड़ने वाली है। लेखकों की रॉयल्टी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के दायरे में शामिल है। इसके अलावा रोपवे, मेट्रो, मोनो रेल, ट्रॉम जैसी सेवाओं पर जीएसटी लगेगा। वाणिज्य कर विभाग में चल रही अधिकारियों की ट्रेनिंग में यह जानकारी जीएसटी एक्सपर्ट राजेश गुप्ता ने दी।
प्रशिक्षण में बताया गया है कि जीएसटी आने के बाद कई क्षेत्र टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। लेखक को मिलने वाले रॉयल्टी पर भी टैक्स देना पड़ेगा। इसके अलावा कंपनियों के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और उसके बाद होने वाले पेटेंट के प्रोडक्शन पर भी टैक्स देना होगा। किसी सॉफ्टवेयर के डेवलपमेंट, डिजाइनिंग, प्रोग्रामिंग भी जीएसटी के दायरे में है। अगर कोई बिल्डर प्रोजेक्ट बनाने के दौरान और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट से पहले एडवांस लेता है तो उस पर भी जीएसटी देना होगा। राजेश गुप्ता ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति अपना मकान किसी कंपनी अधिकारी को किराए पर देता है और किराए की अदायगी कंपनी करती है तो मकान मालिक को जीएसटी देना होगा। प्रशिक्षण कार्यशाला में वाणिज्य कर आयुक्त रणवीर सिंह चौहान के अलावा प्रदेशभर से आए वाणिज्य कर अधिकारी मौजूद रहे।
रोपवे पर भी लगेगा जीएसटी
अभी तक सर्विस टैक्स के दायरे से मुक्त रोप-वे भी जीएसटी के दायरे में होंगे। इससे रोपवे से आना-जाना महंगा हो जाएगा। एक्सपर्ट राजेश गुप्ता के मुताबिक पहले इन पर सर्विस टैक्स लगता था, जो बाद में ट्रिब्यूनल ने हटा दिया था।
यूपीसीएल,स्पीड पोस्ट पर जीएसटी नहीं
अच्छी बात यह भी है कि उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड की सभी गतिविधियां जीएसटी से मुक्त रहेंगी। इसके अलावा स्पीड पोस्ट और पैकिंग जैसे क्षेत्रों को भी जीएसटी से मुक्त रखा गया है। फार्म हाउस को लेबर की सप्लाई, कृषि भूमि लीज पर देने जैसे मामलों के अलावा शिक्षा को भी जीएसटी के बाहर रखा गया है।