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यहां हुई दुनिया के सबसे बड़े श्रीयंत्र की स्थापना, पांचवे धाम के रूप में होगी इस आश्रम की मान्यता

Wed, 18 Apr 2018 09:07 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, अल्मोड़ा/लमगड़ा
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प्रदेश के राज्यपाल डॉ. केके पाल ने बुधवार को लमगड़ा के कल्याणिका देवस्थानम आश्रम डोल में बने नए भव्य और विशाल मंदिर में 1670 किलो वजन के दुनिया के सबसे बड़े श्रीयंत्र का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने  उम्मीद जताई किश्रीयंत्र स्थापित होने के बाद यह स्थान राज्य में पांचवें धाम के रूप में मान्यता हासिल करेगा।

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उन्होंने कहा श्रीयंत्र की स्थापना के बाद डोल आश्रम दुनिया के महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों से जुड़ गया है, जो पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। इस मौके पर संत कल्याणदास जी महाराज ने कहा कि इस क्षेत्र में कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों को विकसित करने की अपार संभानाएं हैं।

लोकार्पण के बाद बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल डॉ. पाल ने कहा डोल आश्रम धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों को शिक्षित करने और जन कल्याण के कार्यों के लिए भी अलग स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे पावन पर्व पर यहां पर दुनिया का सबसे बड़ा श्रीयंत्र स्थापित कर दिया गया है।
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संत कल्याणदास द्वारा किए जा रहे इस प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस ध्यानपीठ में श्रीयंत्र की स्थापना होने से इस आश्रम से आध्यात्म से जुड़े लोगों का जुड़ाव पहले से अधिक होगा।

साथ ही डोल ही नहीं इस पूरे क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा। राज्यपाल ने कहा कि संत कल्याण दास द्वारा यहां पर जो भी मानव हित के लिए कार्य कराए जा रहे हैं वह हम सब के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने युवाओं से भी इन कार्यक्रमों से जुड़ने का आह्वान किया। यहां पर राजराजेश्वरी देवी की मूर्ति की भी स्थापना की गई है।  
 

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 संत कल्याण दास जी महाराज ने कहा कि अर्थ के बगैर मानव जीवन का महत्व नहीं है इसलिए हमें साधन और साध्य दोनों को बनाए रखना होगा। कहा कि इस पूरे क्षेत्र में कई स्थानों को धार्मिक और पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं हैं। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा और मध्यप्रदेश के सत्यनारायण ने भी विचार रखे और आश्रम द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

इससे पहले स्वामी विवेश्वरानंद ने आश्रम की स्थापना से लेकर वहां पर संचालित गतिविधियों के बारे में प्रकाश डाला। संस्कृत विद्यालय के बच्चों और अन्य बालिकाओं ने वंदना और अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ईवा आशीष, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी रेणुका देवी, एडीएम कैलाश सिंह टोलिया, एसडीएम विवेक राय, एकेसिंह, प्रशिक्षु एसडीएम मनीष बिष्ट, डीएसपी कमलराम, तहसीलदार पीडी सनवाल, पूर्व विधाक मनोज तिवारी, सुभाष पांडे, रमेश बहुगुणा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह महरा, केवल सती, दिनेश कुंजवाल, तारु जोशी, दिनेश सतवाल, पीतांबर पांडे सहित भारी संख्या में अन्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन महामंडलेश्वर हरिचितानन्द और स्वामी विरेंद्र पाल ने किया।  
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प्राकृतिक सौंदर्य देखकर अभिभूत हुए राज्यपाल

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प्राकृतिक सौंदर्य देखकर अभिभूत हुए राज्यपाल  
 घने जंगल के बीच में बने आश्रम की प्राकृतिक सुंदरता देखकर राज्यपाल केके पाल अभिभूत हो गए। उन्होंने कहा  कि घने जंगलों से पानी की उपलब्धता के साथ यहां की शांत वादियां पर्यटकों को अपनी ओर बरबस आकर्षित करती हैं। राज्यपाल के साथ उनकी धर्मपत्नी ओमिता पाल और डॉ. योगेंद्र सिंह रावत भी थे।  

संतों का आगमन शुरू, पूजा-अर्चना के साथ दिनभर होते रहे भजन
कल्याणिका देवस्थानम आश्रम डोल में 1670 किलो वजन का दुनिया के सबसे बड़ा श्रीयंत्र की प्राण प्रतिष्ठा पर पूजा अर्चना के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। यहां सुबह से शाम तक भजन-कीर्तन के कार्यक्रम भी चल रहे हैं। बाहर से संतों का पहुंचना भी शुरू हो गया है। आश्रम में 21 अप्रैल से तीन दिवसीय संत सम्मेलन कार्यक्रम भी होगा। 21 से 29 अप्रैल तक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक मुरारी बापू महाराज भी राम कथा प्रस्तुत करेंगे। इधर आश्रम में संत जगतगुरु श्यामदेवानंद, आत्मा राम राजगुरु, महामंडलेश्वर निगुण दास आदि पहुंच चुके हैं।
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