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हिमालयी जैव विविधता देख दुनिया हुई दंग

Mon, 26 Dec 2016 10:47 AM IST
रजा शास्त्री / अमर उजाला, देहरादून
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himalaya
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जैव विविधता संरक्षण के लिए मैक्सिको में आयोजित 13वीं कॉन्फ्रेंस आफ पार्टीज (सीओपी-13) में विश्व के 33 देश हिमालयी जैव विविधता देख दंग रह गए।
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इन्होंने अंतरराष्ट्रीय हिमालयन पार्टनरशिप के लिए अपना समर्थन दिया। इसके अलावा एक उपलब्धि यह भी रही कि संयुक्त राष्ट्र की जैव विविधता वेबसाइट में हिमालयी शृंखला को पहली बार स्थान मिला है। इससे विश्व के अन्य लोग भी हिमालयी जैव विविधता की बारीकियां जान सकेंगे। जलवायु परिवर्तन के जैव विविधता पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को न्यूनतम करने के लिए विश्व के 32 देशों ने अंतरराष्ट्रीय संधि की है।

जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान ने 12 से 17 दिसंबर तक कनकून (मैक्सिको) में आयोजित सीओपी-13 में हिमालयी जैव विविधता के संबंध में विस्तार से प्रस्तुति दी। विश्व के 34 जैव विविधता हॉट स्पॉट में चार हिमालय में हैं। एक तरफ हिमालय संजीवनी बूटी समेत कई ऐसी औषधियों का केंद्र है जो विश्व में कहीं नहीं मिलतीं। इसके साथ ही हिमालयी भूगर्भ दुर्लभ खनिज तत्वों से भरा हुआ है। वन संपदा, वन्य जीव संपदा, ग्लेशियर आदि का ऐसा समन्वय और कहीं नहीं है।
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इस मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. पीपी ध्यानी ने जब अंतरराष्ट्रीय हिमालय वर्ष, विश्व हिमालय दिवस और विश्व हिमालय फोरम की स्थापना का मशविरा दिया तो संधि के सभी मित्र देशों ने एक स्वर में पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। चीड़ की पत्तियों के औद्योगिक उपयोग और जंगलों को आग से बचाने की योजना को सभी देशों ने सराहा। यह भरोसा भी पैदा हुआ कि अब हिमालय संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में शामिल किया जाएगा। विश्व हिमालय दिवस और वर्ष मनाने की स्वीकृति संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली को देनी है। इसका फायदा यह होगा कि जलवायु परिवर्तन के दु्ष्प्रभावों से जैव विविधता को बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट यहां शुरू हो सकेंगे।
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हिमालय की जैव विविधता ने विश्व के देशों को हैरत में डाल दिया। विश्व हिमालय दिवस के संबंध में विश्व के देशों ने समर्थन दिया है। हिमालय पर जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। वैश्विक मंचों पर हिमालय की पहचान होनी बहुत जरूरी है। एजेंडों, प्रक्रियाओं और समझौतों में हिमालय के शामिल होने से क्षेत्र का विकास होगा।
- डॉ. पीपी ध्यानी, निदेशक जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान
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