घर को बनाया गौरेया संरक्षण केंद्र
शिक्षक दिनेश चंद्र कुकरेती ने अपने घर को ही गौरैया संरक्षण केंद्र में तब्दील कर दिया है। गत 26 वर्षो से सेव नेस्ट, सेव बर्ड्स मुहिम चलाकर गौरैया का संरक्षण विभिन्न प्रयोगों और अनुभवों के आधार पर कर रहे हैं। उनके घर में 80 से अधिक जालीदार नेस्ट बॉक्स लगे हैं। जिसमें 100 से अधिक जोड़े रहते हैं।
साथ ही घर के आसपास 500 से अधिक नेस्ट बॉक्स लगाए हैं। नेस्ट बॉक्स वह स्वयं बनाते हैँ, जिसमें उनका परिवार सहयोग करता है। उनका कहना है कि वर्ष 2008 में जहां क्षेत्र में 3000 हजार गौरेया थी, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 18,000 हो गई है। उन्होंने हाल ही मेरा परिवार, पक्षी परिवार अभियान शुरू किया है, जिसमें 500 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।