यह ग्रीन हाउस गैसों का एक प्रमुख घटक है। आईपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार यदि धरती पर तापमान बढ़ने का यही सिलसिला रहा तो वर्ष 2052 तक धरती के तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो जाएगी जो पृथ्वी के पर्यावरण को प्रभावित करेगी।
वायुमंडल में मौजूद ग्रीन हाउस गैसें सांस के माध्यम से सीधे मानव शरीर में प्रवेश करके विभिन्न वायुजनित बीमारियों को न्योता देती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार यातायात में प्रयुक्त वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले कॉर्बन डाईऑक्साइड से पादप व फफूंदी के पराग तथा बीजाणु के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
यह हवा के माध्यम से मानव शरीर में पहुंच कर अस्थमा, राइनाइटिस तथा सीओपीडी, स्किन कैंसर एवं अन्य एलर्जी जैसे घातक बीमारियों को बढ़ावा देते है। ग्रीन हाउस गैसों का पृथ्वी पर एक उचित व नियंत्रित मात्रा में होना लाभदायक है। लेकिन इनकी अधिकता मानव जीवन के साथ पर्यावरण पर भी दुष्प्रभाव डाल रही है।