तराई में नदियों की हालत भी अच्छी नहीं
ऊधम सिंह नगर में लोहिया बैराज में काशीपुर में बेहला, सितारंगज में नंधौर (उससे पहले पानी की गुणवत्ता बी श्रेणी में है), पंतनगर में कल्याणी नदी का पानी ई श्रेणी में है। नैनीताल में नैनी झील समेत अन्य सभी झील, गौला, भवाली में कैंची धाम के पास शिप्रा नदी और अल्मोड़ा में कोसी नदी का पानी बी श्रेणी में मिला है।
जांच की पांच श्रेणियां होती हैं
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नदियों की जल गुणवत्ता को ए, बी, सी, डी और ई श्रेणी में बांटा हुआ है। ए श्रेणी उच्च गुणवत्ता वाले जल को दर्शाती है, जो पीने और नहाने के लिए सुरक्षित है। बी श्रेणी में नहाने और मछली पकड़ने के लिए जल ठीक माना जाता है। सी श्रेणी मध्यम गुणवत्ता वाले जल को दर्शाती है, जो सिंचाई और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपयुक्त हो सकती है। डी श्रेणी में जल की गुणवत्ता को सिंचाई और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए कम ठीक माना जाता है। ई-श्रेणी निम्न गुणवत्ता वाले जल को दर्शाती है, जो विशेष रूप से औद्योगिक शीतलन और नियंत्रित अपशिष्ट निपटान के लिए ठीक माना जाता है।
ये भी पढ़ें...Haridwar: रोती-बिलखती रही नाबलिग बेटी, मां ने कहा ये सब करना ही पड़ेगा...भाजपा नेत्री की करतूत से हर कोई हैरान
नदियों को प्रदूषित करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही अन्य सरकारी विभाग के सहयोग से नदियों की स्थिति को बेहतर करने के लिए प्रयास किया जाएगा। -डॉ पराग मधुकर धकाते, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड