एशिया के सबसे ऊंचे वृक्ष की समाधि
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इस बहुमूल्य धरोहर के संरक्षण के लिए वन विभाग की ओर से संग्रहालय बनाया गया है, जहां चीड़ महावृक्ष के अवशेष रखे गए हैं। वन विभाग की ओर से हर साल एक से सात जुलाई तक प्रदेशभर में आयोजित वन महोत्सव के अंतर्गत इस क्षेत्र में पौधरोपण किया जाता है।
महावृक्ष की समाधि के पास वन विभाग की ओर से लगाए बोर्ड में लिखा है कि वृक्ष का दो से पांच जनवरी 2007 तक उपचार किया गया था। वृक्ष जड़ से ऊपर लगभग साढ़े तीन फीट तक खोखला हो चुका था।
जिसका भारतीय वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एएन शुक्ला के नेतृत्व में चार दिन तक उपचार किया गया था, लेकिन आठ जनवरी 2007 को आई आंधी से पेड़ गिर गया था। समाधि में रखे वृक्ष के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए साल में एक बार मोनोक्रोटोफॉस का छिड़काव किया जाता है।