फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नंदा देवी चोटी से बर्फ में दबे शवों को निकालने आईटीबीपी और एसडीआरएफ के साथ जाएंगे एवरेस्टर रतन सिंह

Wed, 05 Jun 2019 08:07 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
एवरेस्ट विजेता रतन सिंह सोनाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

नंदा देवी ईस्ट में पर्वतारोहण के दौरान एवलांच आने से बर्फ में दबे पर्वतारोहियों के शवों को निकालने के लिए सेना, आईटीबीपी और एसडीआरएफ का संयुक्त अभियान बुधवार से चलेगा। आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी एवं एवरेस्ट विजेता रतन सिंह सोनाल के नेतृत्व में अभियान चलेगा। रतन सिंह आईटीबीपी के अन्य पर्वतारोहियों के साथ मंगलवार को पिथौरागढ़ पहुंच गए हैं। 

विज्ञापन


13 मई को मुनस्यारी से नंदादेवी ईस्ट में पर्वतारोहण के लिए गए 13 सदस्यीय दल में से आठ पर्वतारोही ब्रिटेन निवासी लीडर मार्टिन मोरिन, ब्रिटेन के ही पर्वतारोही जोन चार्लिस मैकलर्न, रिचर्ड प्याने, रूपर्ट वेवैल, अमेरिका के एंथोनी सुडेकम, रोनाल्ड बीमेल, आस्ट्रेलिया की महिला पर्वतारोही रूथ मैकन्स और इंडियन माउंटनेयरिंग फेडरेशन के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडेय लापता हो गए थे।

सेना के हेलीकॉप्टर से चले सर्च अभियान के दौरान पांच पर्वतारोहियों के शव बर्फ में पड़े देखे गए हैं। इन शवों को निकालने के लिए सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ की संयुक्त टीम गठित की जा रही है। इस दल का नेतृत्व भारत तिब्बत सीमा पुलिस के द्वितीय कमान अधिकारी और पर्वतारोही रतन सिंह सोनाल करेंगे।
विज्ञापन


आईटीबीपी ने बर्फ में दबे पर्वतारोहियों के शवों को निकालने के लिए कुछ विशेष उपकरण भी दिल्ली से मंगाए हैं। इन उपकरणों के पहुंचने के बाद पहले सेना के हेलीपैड में अभ्यास किया जाएगा। इसके बाद टीम हेलीकॉप्टर से पर्वतारोहियों के शवों को निकालने के लिए नंदा देवी ईस्ट के लिए रवाना होगी। 

डीएम ने सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ के अफसरों संग की बैठक 

नंदा देवी पर्वत के आसपास बर्फ में पड़े पर्वतारोहियों के शवों को निकालने का काम बुधवार से शुरू होगा। इस अभियान को लेकर डीएम डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने मंगलवार को सेना, आईटीबीपी और एसडीआरएफ के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों के संबंध में विस्तार से चर्चा की। विदेशी पर्वतारोहियों के साथ हुई घटना की जानकारी प्रशासन की ओर से केंद्र सरकार, राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय को भी भेजी गई है।

आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने बताया कि लापता पर्वतारोहियों के रेस्क्यू के लिए अपनी टीम के साथ पैदल बेस कैंप तक गए आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी सुनील कुमार भी वापस लौट आए हैं। हेली से ऑपरेशन चलाने से पहले टीम के सदस्य उनसे भी वहां की जमीनी स्थितियों के संबंध में बातचीत करेंगे। 

बर्फ में दबे शवों को निकालने में बरतनी होगी सावधानी
बर्फ में दबे पर्वतारोहियों के शवों को निकालने के लिए तैयार टीम में सभी विशेष प्रशिक्षित पर्वतारोही शामिल किए गए हैं। इसके बावजूद हिमालयी क्षेत्र में चलने वाले इस ऑपरेशन में शामिल सदस्यों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। एवरेस्ट विजेता और पर्वतारोहण में एक्सपर्ट आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी रतन सिंह सोनाल ने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगातार एवलांच आने के खतरे रहते हैं।

जिस स्थान पर शवों की लोकेशन बताई गई है वह लगभग छह हजार मीटर की ऊंचाई पर है। यदि शव बर्फ में अधिक गहराई तक दबे होंगे तो उन्हें निकालने में कुछ मुश्किलें आ सकती हैं। मौके पर पहुंचकर ही वस्तुस्थिति का पता चल सकेगा। 
विज्ञापन

ऑपरेशन के लिए रूट की बेहतर रेकी भी जरूरी

एवरेस्ट विजेता शीतल का मानना है कि जहां पर्वतारोहियों के शव पड़े हैं, वहां से उन्हें लाना का काम बेहद मुश्किल है। इस बार बर्फबारी अधिक हुई है। इस वजह से भी रेस्क्यू में दिक्कतें आएंगी। शवों को लाने के लिए एक्सपर्टों का सहयोग लेने के साथ ही बड़ी टीम भेजनी होगी।
 
रेस्क्यू के दौरान एवलांच आने का खतरा है। शीतल कहती हैं कि रेस्क्यू टीम का आपस में सामंजस्य बेहतर होना चाहिए। इसके लिए रूट की बेहतर रेकी भी जरूरी है। शव लाने वही एक्सपर्ट जाएं, जिसे रूट का पता हो। 

बर्फ में फंसे पर्वतारोहियों के शवों को निकालने के लिए आईटीबीपी की टीम पिथौरागढ़ पहुंच गई है। द्वितीय कमान अधिकारी रतन सिंह सोनाल इसका नेतृत्व करेंगे। कुछ विशेष उपकरण दिल्ली से मंगाए गए हैं। इन उपकरणों के पहुंचने के बाद एक बार टीम में शामिल सदस्य हेलीपैड पर ही अभ्यास करेंगे। इसके बाद नंदा देवी पर्वत की ओर रवाना होंगे। - एपीएस निंबाडिया, डीआईजी भारत- तिब्बत सीमा पुलिस। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें