कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल बागेश्वर के 12वीं कक्षा के छात्रा सक्षम रौतेला ने वर्ष 2012-13 में शतरंज खेलना शुरू किया था। सक्षम ने बताया कि साल 2019 उनके लिए बहुत निर्णायक रहा। क्योंकि एक तरफ हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा थी तो दूसरी ओर शतरंज में वह काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे और उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस साल वह अपना आईएम टाइटल प्राप्त कर लेगें।
इसके लिए पढ़ाई के साथ ही उन्होंने शतरंज की प्रैक्टिस जारी रखी, जिसका परिणाम उन्हें आईएम के रूप में मिला। सक्षम रौतेला ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता किरन रौतेला और पिता बालम सिंह रौतेला और अपने शतरंज कोचों को देते हैं। कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने तक पहुंचाने के लिए काफी कुछ त्याग किया है। समक्ष के पिता बालम सिंह रौतेला ने बताया कि शतरंज में बेटे का करियर बनाने के लिए उनके परिवार को राज्य छोड़कर दिल्ली में जाकर बसना पड़ा।
समक्ष ने अपने शतरंज कैरियर में देश-विदेश में अब तक विभिन्न आयुवर्ग में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट जीत चुके हैं। समक्ष ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उनका अगला लक्ष्य ग्रैंड मास्टर(जीएम) बनना है। अभी कोरोना के चलते कई टूर्नामेंट रद्द हो गए हैं और इस साल 12वीं की बोर्ड परीक्षा होने से वह फिलहाल पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं। इसके बाद फिर से अपने अगले लक्ष्य के लिए जुट जाएंगे। उनके छोटे भाई सद्भव भी शतरंज में अंडर-7 और अंडर-9 में कई राज्य और राष्ट्रीय खिताब जीत चुके हैं।