कुमाऊं में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट की ओपीडी में प्रतिवर्ष 8352 रोगी आते हैं। वर्ष 2020 में यह संख्या 6214 हो गई। कुमाऊं में मुंह, गले और बच्चेदानी के कैंसर रोगियों की संख्या सबसे अधिक है।
मुंह और गले के कैंसर के रोगी : 23 प्रतिशत
बच्चेदानी के कैंसर के रोगी : 19 प्रतिशत
स्तन कैंसर के मरीज : 12 प्रतिशत
फेफड़े के कैंसर के रोगी 15 प्रतिशत
दो जरनल भी प्रकाशित
स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में पेशाब की थैली का कैंसर और मुंह एवं गले के कैंसर को लेकर शोध किया गया। दोनों को लेकर दो जरनल भी प्रकाशित हुए। इंस्टीट्यूट के प्रमुख डॉ. केसी पांडे ने बताया कि पेशाब की थैली के कैंसर पर सबसे अधिक काम जापान में हुआ है, जबकि मुंह एवं गले के कैंसर को लेकर देश के कई बड़े संस्थानों में काम हुआ। बड़े संस्थानों से तुलना करने पर स्पष्ट हुआ कि उनके जैसा इलाज यहां भी मरीजों को मिल रहा है। इसके अलावा दो जनरल और प्रकाशित हुए हैं।
धरातल पर नहीं उतर पाया है स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट
वर्ष 2014-2015 से चल रहा स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट का प्रोजेक्ट अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। इंस्टीट्यूट के लिए वर्ष 2019 में शासन से 152 पद स्वीकृत किए गए थे। ब्रिडकुल को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था। अभी तक वन भूमि का पेच फंसा हुआ है। हालांकि, स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए नए सिरे से वन भूमि मांगी गई है। इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. केसी पांडे का कहना है कि एनजीटी ने इंस्टीट्यूट के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है।