विश्व बैंक व प्रदेश सरकार के माध्यम से एक योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके लिए विश्व बैंक उत्तराखंड को 170.1 मिलियन डालर (लगभग 11 अरब रुपए) देगा।
पलायन पर रोक लगाने का उद्देश्य
बताया गया है कि सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों और वर्षा आधारित कृषि भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ाने, किसानों की आर्थिकी सुधारने, पलायन पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।
गुरुवार को मुनिकीरेती स्थित गंगा रिजॉर्ट में परियोजना फेज दो की प्रकटीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें परियोजना से जुड़े लगभग 115 अधिकारियों और ग्रामीणों को फेज दो के माध्यम से होने वाले कार्यों और परियोजना के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी गई।
2020 तक चलेगी योजना
उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम विकास परियोजना के निदेशक (गढ़वाल) अखिलेश तिवारी ने बताया कि योजना इसी वित्तीय वर्ष में शुरू की जाएगी और यह वर्ष 2020 तक चलेगी।
कार्यशाला में डिप्टी डायरेक्टर परियोजना पीएन शुक्ला, डिप्टी डायरेक्टर विकासनगर सीबी त्रिपाठी, डिप्टी डायरेक्टर गैरसैंण एनएस बर्फवाल, डिप्टी डायरेक्टर चिन्यालीसौण आरके सिंह आदि मौजूद रहे।
3.18 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
परियोजना फेज दो के तहत प्रदेश के आठ जनपदों के 18 विकास खंडों में योजना लागू की जाएगी। इसमें 509 ग्राम पंचायतों और 1066 राजस्व ग्रामों के लगभग 3.18 लाख लोगों को योजना का लाभ मिलेगा।
सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में संचालित होगी
700-2700 मीटर ऊंचाई के बीच स्थित सूक्ष्म जलागम के 82 सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में परियोजना का संचालन किया जाएगा।
जिसमें वर्षा आधारित कृषि, सिंचाई की कमी वाले क्षेत्रों, आधारभूत संरचना की कमी, निर्धनता से प्रभावित दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र, अनुसूचित जाति-जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों को चयनित किया गया है।
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