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श्रमिकों ने हर किसी का दरवाजा खटखटाया, कोई भी आश्वासन काम न आया

Fri, 01 Jun 2018 08:24 AM IST
सुनील दिवाकर , अमर उजाला, बाजपुर
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पांच महीने से वेतन नहीं मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे श्रमिकों ने हर किसी का दरवाजा खटखटाया, लेकिन श्रमिकों को वेतन नहीं, बल्कि कोरा आश्वासन ही मिला। पैसों की तंगी से जूझते मिल के दो श्रमिकों की जान चली गई। वहीं बीमार पांच श्रमिक धन के अभाव में इलाज तक नहीं करा पा रहे हैं, जिससे उनके परिजन भी सदमे में है।

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बाजपुर चीनी मिल कर्मचारी फरवरी से वेतन को लेकर आंदोलन पर हैं। इस बीच श्रमिक विभिन्न संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजे गए। मजदूर भाजपा नेताओं के साथ देहरादून जाकर सीएम से भी मिले। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत, यशपाल आर्य, अरविंद पांडे और सांसद भगत सिंह कोश्यारी सहित कई प्रदेश सरकार के नुमांइदो से गुहार लगाई। मंत्रियों ने इतना जरूर कहा कि मुख्यमंत्री के समक्ष मामले को रखकर उनकी समस्या का हल कराएंगे। वहीं पांच महीने का वेतन नहीं मिलने से श्रमिक एक-एक पैसे के लिए मोहताज हो चुके हैं। 

बाजपुर चीनी मिल के कुली राजेंद्र की बीती 29 मई को धन के अभाव में इलाज नहीं होने से मौत हो गई थी। भड़के श्रमिकों ने राजेंद्र के शव को मिल गेट पर रखकर प्रदर्शन किया था। अब बृस्पतिवार को धन के अभाव में बेहतर इलाज न मिलने पर गन्ना यार्ड के सुपरवाइजर हीरालाल भारती की भी जान चली गई। 
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मिल के दो श्रमिकों की मौत से मजदूरों में आक्रोश है। चीनी मिल के गन्ना विभाग में तैनात लिपिक कुलदीप सिंह कैंसर और श्रमिक टीकाराम की पत्नी रुपवती टीबी की बीमारी से ग्रस्त है, जबकि तीन मजदूरों के परिजन पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पा रहे हैं। श्रमिक नेता विशेष शर्मा ने बताया कि पूर्व कैबिनेट मंत्री इंटक के प्रदेश अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने श्रमिकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए चीनी मिल कर्मियों के वेतन सहित अन्य मामलों को लेकर सीएम से मिलने की बात कही है।

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