-कांग्रेस नेता बोले, लाठी के दम पर श्रमिकों की आवाज दबाने की कोशिश
-सरकार श्रमिकों का 20 से 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन तय करे
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। लाठी के दम पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
रविवार को कांग्रेस भवन में प्रेसवार्ता में डॉ. रावत ने कहा, उद्योग प्रबंधन की ओर से श्रमिकों के मौलिक अधिकारों व श्रम कानूनों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जिस कारण श्रमिकों में आक्रोश है वह कई बार सरकार और उद्योग प्रबंधन से अपनी मांगों के समर्थन में वार्ता कर चुके हैं। लेकिन अनदेखी से श्रमिकों का धैर्य टूट रहा है और सड़क पर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं।
डॉ. हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि उद्योगों में महिला श्रमिकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उद्योगों में महिलाओं के लिए अलग से शौचालय तक की व्यवस्थाएं नहीं है। श्रमिकों की शिकायतें है कि आठ घंटे से ज्यादा कार्य लिया जाता है और उसका उचित भुगतान भी नहीं मिलता है। सरकार की ओर से जो न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया, उससे महंगाई के दौर में परिवार का पालन पोषण करना संभव नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि अकुशल श्रमिकों को 20 हजार, अर्द्ध कुशल को 23 हजार, कुशल को 25 हजार व अति कुशल श्रमिकों को कम से कम 30 हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया जाए। श्रमिकों को मिलने वाला न्यूनतम वेतन, पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी बोनस, महंगाई भत्ता, पेंशन लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि श्रम विभाग तत्काल उच्च स्तरीय समिति बना कर उद्योगों का निरीक्षण करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उद्योगों में श्रमिकों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो श्रमिक संगठनों, इंटक के साथ मिल कर कांग्रेस आंदोलन करेगी। इस मौके पर पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा,प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, इंटक के गढ़वाल मंडल अध्यक्ष राकेश कुमार राजपूत मौजूद रहे।