वैली ऑफ वर्ड्स की ओर से आयोजित तीन दिवसीय लिटरेचर व आर्ट फेस्टिवल के दूसरे दिन कई पुस्तकों पर चर्चा हुई। ज्वलंत विषयों पर भी विशेषज्ञों ने विचार व्यक्ति किए। इस दौरान फेस्टिवल में साहित्य प्रेमियों की भीड़ रही। सुबह दस बजे से शुरू हुए दूसरे दिन के पहले सेशन में लेखक रूबी गुप्ता ने ‘नो इल्यूजन इन जैनाडु्’ पुस्तक पर चर्चा की। इसके बाद तीन अलग-अलग हॉल में दिनभर कई सेशन आयोजित किए गए।
इसमें प्रमुख रूप से लेखक प्रमोदिनी वर्मा व अनुभव प्रधान की ‘किपलिंग एंड यीट्स एट 150’ पुस्तक पर दिव्या सक्सेना के साथ चर्चा, ले. जनरल प्रवीन बख्शी, राकेश लुंबा व शौकीन चौहान की ‘नॉर्थ ईस्ट - इज असम राइफल्स रिडंडेंट’, द इंडियन आर्मी इन वर्ल्ड वार प्रथम पर शिव कुमार वर्मा, कश्मीर, द रोड अहेड पर इकबाल मल्होत्रा ने ले. जनरल प्रकाश कटोच व शिव कुमार वर्मा के साथ चर्चा की। ‘महाभारत-चिल्ड्रन इलुस्ट्रेटेड क्लासिक्स’ आदि विषयों पर चर्चा की गई। अंत में ‘मिलिट्री हिस्ट्री एंड स्ट्रेटजी’ सेशन भी खासा रुचिकर रहा।
सेशन का समापन बल्ले-बल्ले, पंजाब के वाईब्रेंट भंगड़ा ट्रूप ने जोशीले अंदाज में किया। इस दौरान परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉल पर भी साहित्य प्रेमियों व छात्रों ने पुस्तकों की जानकारी ली। फेस्टिवल में आर्ट गैलरी में पेंटिंग्स भी प्रदर्शित की जा रही है। जिनका लोग अवलोकन कर रहे हैं।
‘आप याद आते हैं’ पुस्तक का विमोचन
वैली ऑफ वर्ड्स की ओर से आयोजित इंटरनेशनल लिटरेचर एंड फेस्टिवल में शनिवार को समाजसेवी व उद्योपति डॉ. एस फारूख की पुस्तक ‘आप याद आते हैं’ का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में डॉ. फारुख ने अपने वालिद की यादों को संजोया है।
शहर के एक होटल में आयोजित विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुस्तक के बारे में बताते हुए डॉ. एस फारुख ने कहा कि उनका मानना है कि ज्ञान अगर बांटा न जाए तो वह इंसान के पास ही खत्म हो जाता है। वैसे ही जैसे आप किसी चीज को बंद करके रख दें और उसे इस्तेमाल न करें तो वह खराब हो जाती है। इसलिए उन्होंने अपने वालिद के अमल को और उनकी यादों को, जो अच्छी जिंदगी जीने के मिशाल थे। इस किताब के जरिये लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया।
इस दौरान विधायक गणेश जोशी, ले. जनरल ओपी कौशिक, बिग्रेडियर केजी बहल, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष बिंद्रा मौजूद थे। विधायक जोशी ने कहा कि जिस प्रकार डॉ. फारुख ने अपने पिता की यादों को लोगों तक पहुंचाने का काम किया है, इसी तरह हर इंसान को करना चाहिए।
प्राचीन लोक गाथाओं और लोक गीतों पर डाला प्रकाश
गढ़वाल की पुरानी लोक गाथाएं, कथाएं और गीत धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई हैं। यह गाथा, कथा व गीत लिखित न होने के कारण मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती थीं। अंजलि नौरियाल ने इन्हीं कथाओं और गाथाओं को अपनी पुस्तक ‘गढ़वाल हिमालयाज : बैैलैड्स, सॉग्स, मिथ और मैजिक’ में लिखा है। उनकी इस पुस्तक पर राजपुर रोड स्थित होटल मधुबन में आयोजित हो रहे वैली ऑफ वर्ड्स में विशेष चर्चा की गई।
चर्चा में प्रसिद्ध समाजसेवी अनूप नौटियाल ने मार्डरेटर की भूमिका निभाई। इस दौरान डॉ. अंजलि नौरियाल की एक और पुस्तक ‘टिल किंगडम कम’ पर भी चर्चा की गई। यह पुस्तक महासू देवता पर आधारित है। डॉ. अंजली ने बताया कि गढ़वाल की जो पुरानी लोक गाथाएं और कथाएं हैं, वह आज विलुप्ति की कगार पर पंहुच गईं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण उनका लिखित रू प में न होना रहा।
यह मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती थी, लेकिन धीरे-धीरे इन गाथाओं और कथाओं को सुनाने और गाने वाले भी कम रह गए। उत्तराखंड में अब कुछ ही लोग हैं, जो इन्हें जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी दूसरी पुस्तक ‘टिल किंगडम कम’ में जौनसार के महासू देवता के बारे में विस्तार से बताया गया है।