हनोल मंदिर में काठ का हाथी। स्रोत : जागरूक पाठक
- जंदोई के साथ अधिकतर गांवोंं में पांच दिवसीय नई दीपावली का हुआ समापन
- कुछ गांवों में आज भी नचाया जाएगा हाथी और हिरण
त्यूणी। जंदोई मेले पर प्रसिद्ध महासू मंदिर हनोल परिसर में काठ का हाथी नचाया गया। लोगोंं ने हाथी को कंधे पर उठाकर मंदिर की परिक्रमा की। यहां नाच देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। लोगों ने देवता के हारुल पर पारंपरिक जैंता, रासौ और तांदी नृत्य किया। इसी के साथ जौनसार बावर की नौ खतों के अधिकतर गांवों में पांच दिवसीय दीपावली का समापन भी हो गया।
जौनसार बावर के नौ खतों के 100 गांवों में बीते पांच दिनों तक नई दीपावली की धूम रही। बृहस्पतिवार को हनोल मंदिर देवता के थान मुंधोल, कांडोई भरम और सैंज कुनैन में काठ से बने हाथी को भव्य रूप में सजाया गया। ग्रामीणों ने पहले हाथी को कंधे पर उठाकर मंदिर की परिक्रमा कराई। उसके बाद ढोल-दमाऊ और रणसिंघा की धुन पर मंदिर परिसर में हाथी को नचाया। इस पारंपरिक नृत्य को देखने के लिए अन्य खतों के गांवों से भी लोग पहुंचे थे। चिल्हाड़ स्थित महासू देवता की बहन बलाणी देवी का मंदिर में भिरुड़ी पर्व की शुरूआत हुई। कुछ गांवों में शुक्रवार को भी काठ का हाथी और हिरण नचाया जाएगा। इस दौरान महासू मंदिर हनोल के राजगुरु गोरखनाथ, स्याणा महेंद्र सिंह चौहान, स्याणा सूरतराम जोशी, पीतांबर दत्त बिजल्वाण, विजयपाल रावत, लोक कलाकार अर्जुन देव बिजल्वाण, मोहनलाल बिजल्वाण, केशवानंद शर्मा, रामलाल सेमवाल आदि मौजूद रहे।
हनोल मंदिर में काठ का हाथी। स्रोत : जागरूक पाठक