करवा चौथ सिर्फ हिंदू परिवारों तक सीमित नहीं रह गया है
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प्रेम का बंधन जाति-धर्म की दीवारों से जुड़ा नहीं होता है। हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के जन्म-जन्मांतर के वैवाहिक संबंधों को प्यार और समर्पण के साथ दृढ़ता प्रदान करता है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं बिना अन्न-जल ग्रहण किए अपने सुहाग के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं। मौजूदा दौर में करवा चौथ सिर्फ हिंदू परिवारों तक सीमित नहीं रह गया है। इसकी मिसाल ट्रांसपोर्ट नगर निवासी गुलफिशा राठौर और रविंदर राठौर हैं। इस साल ही उनकी शादी हुई है।
गुलफिशा ने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा। गुलफिशा बताती हैं कि उन्होंने अपनी हिंदू सहेलियों व पड़ोस की महिलाओं को करवा चौथ के व्रत की तैयारी करते देखा। वहीं, इस पर्व के महत्ता के बारे में भी पता चला। इसके बाद करवा चौथ का व्रत रखा। गुलफिशा ने बताया कि पति की लंबी आयु के लिए धर्म-जाति का कोई मतलब नहीं है।