गोमुख से लेकर गंगासागर तक के क्षेत्र को छह जोन में बांटा गया है। सभी जोन में गंगा प्रहरियों को तैनाती कर गंगा को साफ करने का अभियान शुरू किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना में बड़ी सं?या में महिलाएं भी आगे आई हैं।
गंगा प्रहरी के तौर पर ये महिलाएं न केवल गंगा की सफाई में अपना योगदान दे रही हैं, वरन आजीविका के नए साधन विकसित कर रही हैं। महिलाएं गोमुख से गंगासागर तक घाटों की सफाई करने के साथ ही दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतुओं के संरक्षण में भी अहम योगदान दे रही हैं। इन महिलाओं को सेंटर की ओर से जैव विविधता संरक्षण समेत तमाम मुद्दों की जानकारी दी जा रही है।
सेंटर के वैज्ञानिकों के मुताबिक अभियान से जुड़ी महिलाएं गोमुख से लेकर गंगासागर तक श्रद्धालुओं द्वारा गंगा में प्रवाहित किए गए फूलों को बाहर निकाल कर सफाई के काम में मदद कर रही हैं। इन फूलों से अगरबत्ती तैयार कर आजीविका के नए साधन भी विकसित कर रही हैं।
सेंटर के विज्ञानियों की टीम ने गोमुख से लेकर गंगासागर तक अध्ययन किया गया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि यदि गंगा संरक्षण को लेकर कारगर कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति बिगड़ सकती है।
जीआईएस तकनीक का किया इस्तेमाल
सेंटर की टीम ने गंगा की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करने के लिए जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल किया है। टीम के वरिष्ठ वैज्ञानिक जीशान अली के मुताबिक जीआईएस तकनीक के जरिये इस बात का पता लगाया गया है कि गंगा के संरक्षण को लेकर कहां पर बेहद कारगर कदम उठाने की जरूरत है।