हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रसव के बाद किडनी फेल होने से कुछ दिनों के भीतर कथित तौर पर पांच महिलाओं की मौत होने की खबर से अस्पताल में खलबली मच गई है।
इनमें अस्पताल के ही एक वार्ड ब्वाय की पत्नी भी शामिल है। यह सनसनीखेज मामला सामने आने पर अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, साथ बेहोशी (एनस्थीसियो) के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन का प्रयोग करने पर भी रोक लगा दी है।
इधर, इसी तरह के मामले से पीड़ित दो महिलाओं का सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज भी किया जा रहा है। हालांकि अभी तक मौत की वजहों का असली कारण क्या रहा है, इस पता नहीं चला है। डॉक्टरों की टीम इन मौत के कारणों की जांच में लगी है।
जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत एसटीएच में प्रतिमाह लगभग 15 -16 डिलीवरी होतीं हैं। इनमें से 4-5 डिलीवरी केसों में जटिलता होने पर उनके आपरेशन भी करने पड़ते हैं। बताते हैं कि डिलीवरी के आपरेशन के दौरान बेहोशी के लिए प्रसूता को एलएस एनस्थीसिया (लोअर स्पाइन एनस्थीसिया) दिया जाता है।
बताते हैं कुछ दिनों के दौरान डिलीवरी के बाद कथित तौर पर रीनियल फेलोयर (किडनी फेल) होने के बाद पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है। चर्चा है कि इस वजह से हेमा बिष्ट (27 वर्ष) की दो दिन पूर्व, रजनी (25 वर्ष) तीन दिन पूर्व, नंदनी (25 वर्ष) चार फरवरी, रेखा (38 वर्ष) एक सप्ताह पूर्व मौत हुई है।