सरकारी सेवा में कार्यरत 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी महिला कार्मिकों को स्थानांतरण एक्ट में छूट नहीं दी जाएगी। कार्मिक विभाग ने वरिष्ठ महिला कर्मियों के लिए अलग से आयु निर्धारित करने से साफ इनकार कर दिया है।
उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष यह प्रस्ताव रखा था, जिसे समिति ने ठुकरा दिया है। यह खुलासा समिति की समीक्षा बैठक के जारी कार्यवृत्त से हुआ है। शेष मांगों पर भी समिति के रुख से मोर्चा को झटका लगा है। मोर्चा ने मांगों पर समिति की ज्यादातर संस्तुतियों से असहमति जताते हुए 19 जुलाई को प्रदेश संयोजकों की बैठक में आगे की रणनीति तय करने का फैसला किया है। इससे पहले समिति मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष अपना पक्ष रखने का प्रयास करेगी।
समिति ने शिक्षक-कर्मचारियों को सेवाकाल में तीन प्रमोशन देने के मुद्दे की गेंद यह कहकर संयुक्त मोर्चा के पाले में डाल दी कि उसने समिति को मांग के संबंध में तुलनात्मक विवरण उपलब्ध नहीं कराया। 4600 ग्रेड वेतन वाले सभी शिक्षकों को 17140 रुपये मूल वेतन दिए जाने की मांग को समिति ने संयुक्त मोर्चा की ओर सरका दिया कि वह ऐसे किसी अन्य प्रकरण के बारे में सूचना उपलब्ध कराए तो विचार हो। कार्मिकों के एससीपी की मांग भी यह कहकर समिति ने ठंडे बस्ते में डाल दी कि प्रदेश में केंद्र सरकार से पैरिटी के सिद्धांत के आधार पर एमएसीपी की व्यवस्था लागू है। केंद्र में संशोधन होने की दशा में प्रदेश सरकार उस पर विचार करेगी।
समिति ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों का आधार बताते हुए चतुर्थ श्रेणी कार्मिको के पदों को पुनर्जीवित करने की मांग तो ठुकरा दी, लेकिन 4200 ग्रेड पे की अनुमन्यता के मामले में सचिव वित्त को एसीपी के अंतर्गत समान व्यवस्था लागू करने को कहा गया है। सार्वजनिक निगमों, उपक्रमों व स्वायत्तशासी संस्थाओं में सातवें वेतनमान के एरियर भुगतान की मांग पर समिति ने प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास विभाग को प्रत्येक संस्था की वित्तीय स्थिति का परीक्षण कराकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। उपनल आउटसोर्स, पीटीसी विशेष श्रेणी के माध्यम से कार्यरत कर्मियों को नियमित करने और समान काम का समान वेतन एवं न्यूनतम वेतनमान की मांग पर भी समिति का रुख मोर्चा की अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। समिति ने सभी कार्मिकों को 1200 रुपये प्रतिमाह वाहन भत्ते की मांग को यह कहकर इनकार कर दिया कि यह वित्त हस्त पुस्तिका के अनुसार दिया गया है।
इन मांगों पर संयुक्त मोर्चा को कुछ राहत
-सातवें वेतनमान की संस्तुतियों पर प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाना है
-इंदु कुमार पांडेय की अध्यक्षता में गठित वेतन समिति को भंग कर दिया गया
-पदोन्नति में शिथिलीकरण का प्रस्ताव भी कैबिनेट की बैठक में शीघ्र आएगा
मुख्यमंत्री ने मोर्चा से वार्ता के दौरान यह आश्वासन दिया था कि कर्मचारियों को पूर्व में मिल रहे लाभ और सुविधाएं बहाल होंगी। लेकिन समिति के कार्यवृत्त में एसीपी समेत कई मांगों पर समिति का रुख सकारात्मक नहीं है। 19 जुलाई को प्रस्तावित बैठक में कार्यवृत्त पर चर्चा होगी और मोर्चा आगे की रणनीति बनाएगा।
- ठाकुर प्रह्लाद सिंह, प्रदेश संयोजक, कार्मिक संयुक्त मोर्चा