चौना गांव की सड़क तक पहुंचने से पहले ही संगीता को तीव्र पीड़ा होने लगी। इसके बाद दर्द से तड़पती प्रसव पीड़िता को फन्या नामक स्थान पर डोली से उतारकर खेत में लिटाया गया। संगीता ने माइनस तीन डिग्री तापमान में खेत में ही शिशु को जन्म दिया।
प्रसव के बाद परिजन उसी डोली से संगीता और नवजात शिशु को लेकर घर चले गए। सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह चिराल का कहना है कि एक ओर सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं को खेतों में प्रसव कराना पड़ रहा है।
यातायात सुविधा से वंचित गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ना चाहिए। ग्राम प्रधान हेमा देवी मेहरा ने बताया कि अब तक क्षेत्र में इस तरह के कई मामले हो चुके हैं। प्रसव पीड़िताओं को डोली में बिठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।