दर्द बढ़ने पर आशा वहीं फर्श पर लेट गई। महिला की हालात देखकर लैब के स्टाफ ने इसकी सूचना नर्सों को दी। वहीं बेंच पर लेटाकर महिला का प्रसव कराया गया। काफी देर बाद महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स, वार्ड आया वाहन लेकर वहां पहुंची। वह जज्जा और बच्चा को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। जहां दोनों को भर्ती कराया गया।
वार्ड में ही लिया जाता है सैंपल
आमतौर से प्रदेश के अधिकांश महिला अस्पताल में यह व्यवस्था कि किसी भी तरह की जांच के लिए सैंपल लेने के लिए लैब का कर्मचारी वार्ड में जाता है। जांच के बाद इसकी रिपोर्ट वहीं भेजी जाती है। हरिद्वार के महिला अस्पताल में ऐसी व्यवस्था नहीं। यहां भर्ती गर्भवती महिलाओं को खुद ही लैब तक जाना होता है। शुक्रवार को भी इसी व्यवस्था के चलते एक गर्भवती महिला को दिक्कतें उठानी पड़ी।
अस्पताल में लैब होने के बाद भी सभी जांच नहीं होती
महिला अस्पताल परिसर में पैथोलॉजी लैब है, लेकिन यहां एलएफटी और केएफटी की जांच नहीं होती। गर्भवती महिला को इन दोनों की जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी लैब का क्या फायदा जिसमें सभी तरह की जांच नहीं होती। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भी महिलाओं को जिला अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं।
कांगड़ी गांव की गर्भवती महिला को ओपीडी में देखा और प्रसव के लिए लेबर रूम में भेजा था। हमारे अस्पताल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि गर्भवती महिलाओं का सैंपल लेने लैब का कर्मचारी आए। महिला की स्थिति को देखते हुए स्टाफ नर्स को उसे जिला अस्पताल नहीं भेजना चाहिए था। नर्स से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
- डा. भवानी पाल, सीएमएस, महिला अस्पताल।