कनोल गांव के लिए सड़क सुविधा न होने से एक महिला की जान चली गई। महिला की मौत से गांव वाले सदमे में है। उनका मानना है कि अगर सड़क होती तो महिला की जान बच सकती थी।
दरअसल, गांव की यह महिला कई दिन से बीमार थी। शुक्रवार को उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजन उसे पैदल 14 किमी दूर सड़क तक कुर्सी के सहारे ला रहे थे, लेकिन सड़क से मात्र दो किमी पहले उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव के लिए सड़क की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अगर गांव के लिए सड़क होती को महिला की जान बचाई जा सकती थी।
कनोल गांव की केशरी देवी (52) पत्नी स्व. केदार सिंह की एक सप्ताह से तबीयत खराब थी। शुक्रवार को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। गांव से सड़क की दूरी 14 किलोमीटर है।
ऐसे में परिजन और ग्रामीण महिला को कुर्सी के सहारे सीएचसी घाट ला रहे थे, लेकिन गांव की नजदीकी सड़क से दो किलोमीटर पहले ही केशरी देवी ने दम तोड़ दिया। मायूस परिजन और ग्रामीण उसका शव लेकर घर लौट गए। उमराव सिंह, यशपाल सिंह और पार सिंह का कहना है कि यदि गांव तक सड़क होती तो केशरी देवी को बचाया जा सकता था।
घाट के तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि कनोल गांव के लिए सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित है। यहां वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया पर सड़क कार्य रुका हुआ है। यहां संरक्षित प्रजाति के देवदार के पेड़ सड़क निर्माण में रोड़ा हैं। लोनिवि की ओर से कनोल गांव के लिए सड़क निर्माण पर कार्रवाई की जा रही है।