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चीन सीमा पर नारी शक्ति का भी पहरा, 15 हजार फीट ऊंची चौकियों पर कर रहीं देश की निगहबानी

Fri, 28 Jun 2019 08:29 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
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चीन सीमा क्षेत्र में तैनात महिला कमांडो - फोटो : अमर उजाला
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करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर चीन सीमा पर नारी शक्ति का भी पहरा है। यहां अग्रिम चौकियों को महिला कमांडो दस्ता भी संभाल रहा है। बृहस्पतिवार को आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया ने दारमा घाटी में चीन सीमा से लगी अग्रिम चौकियों का निरीक्षण किया।

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डीआईजी ने महिला कमांडो दस्ते की सराहना की और कहा कि दस्ते में उत्तराखंड, यूपी, झारखंड, बंगाल आदि राज्यों की बेटियां करीब 15 हजार फुट की ऊंचाई में अग्रिम चौकियों में रहकर ड्यूटी निभा रही हैं। 

बताया गया कि 36 वाहिनी आईटीबीपी लोहाघाट के कमांडेंट सुभाष यादव के निर्देशन में दारमा की अग्रिम चौकियों के जवान प्रतिदिन रेकी करते हैं। इस दौरान बड़े खाने का भी आयोजन किया गया। कुमाऊं स्काउट के कर्नल आरएस बिष्ट, कमाडेंट अनिल कुमार फूल, द्वितीय कमान धिकारी बृजमोहन, डिप्टी कमांडेंट संदीप चौधरी, सहायक कमांडेंट विनोद भाटी, इंस्पेक्टर श्रीपाल ह्यांकी, ठेकेदार नेत्र सिंह चलाल, ग्राम प्रधान बोन आशा देवी, किशन बोनाल सहित सेना और आईटीबीपी के जवान मौजूद थे।

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स्थानीय निवासी भी हैं सीमा प्रहरी, हो रही है उपेक्षा

दिलिंग दारमा सेवा समिति अध्यक्ष पूरन सेलाल और महासचिव पूरन ग्वाल ने कहा कि दारमा घाटी के लोग सीमा प्रहरी का कार्य करते हैं। इसके बावजूद सरकार व्यास और दारमा घाटी में मूलभूत सुविधाओं के लिए विशेष ध्यान नहीं दे रही है। स्वास्थ्य, संचार के लिए लोगों को आईटीबीपी और सेना की मदद लेनी पड़ती रहती है। सीमावर्ती लोगों को स्वास्थ्य के लिये दो से 20 किमी दूर पैदल चलकर आईटीबीपी की चौकियों तक जाना पड़ता है। 

दारमा के गांवों को संचार के लिए आईटीबीपी का ही सहारा 
दारमा के सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, दुग्तू, सौन, दांतू, बौन, फिलम, गो, ढांकर, तिदांग, मार्छा, सीपू के ग्रामीण पिछले एक माह से गांव से बाहर जाने को मजबूर हैं। यहां संचार सुविधा नहीं है। आईटीबीपी के पास जीएसपीएस (ग्लोबल सेटेलाइट फोन सर्विस) है। प्रीपेड होने के चलते आपातकाल में ही इसका प्रयोग करने की अनुमति है। प्रधान गो मीरा देवी, बोन आशा देवी, दांतू भागीरथी दताल, प्रेमा देवी आदि ने घाटी के गांवों में संचार और स्वास्थ्य सेवा नहीं होने पर रोष जताया है।  
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