दिलिंग दारमा सेवा समिति अध्यक्ष पूरन सेलाल और महासचिव पूरन ग्वाल ने कहा कि दारमा घाटी के लोग सीमा प्रहरी का कार्य करते हैं। इसके बावजूद सरकार व्यास और दारमा घाटी में मूलभूत सुविधाओं के लिए विशेष ध्यान नहीं दे रही है। स्वास्थ्य, संचार के लिए लोगों को आईटीबीपी और सेना की मदद लेनी पड़ती रहती है। सीमावर्ती लोगों को स्वास्थ्य के लिये दो से 20 किमी दूर पैदल चलकर आईटीबीपी की चौकियों तक जाना पड़ता है।
दारमा के गांवों को संचार के लिए आईटीबीपी का ही सहारा
दारमा के सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, दुग्तू, सौन, दांतू, बौन, फिलम, गो, ढांकर, तिदांग, मार्छा, सीपू के ग्रामीण पिछले एक माह से गांव से बाहर जाने को मजबूर हैं। यहां संचार सुविधा नहीं है। आईटीबीपी के पास जीएसपीएस (ग्लोबल सेटेलाइट फोन सर्विस) है। प्रीपेड होने के चलते आपातकाल में ही इसका प्रयोग करने की अनुमति है। प्रधान गो मीरा देवी, बोन आशा देवी, दांतू भागीरथी दताल, प्रेमा देवी आदि ने घाटी के गांवों में संचार और स्वास्थ्य सेवा नहीं होने पर रोष जताया है।