इसका समाधान किया महिलाओं ने। वह भी पुरुषों के साथ चल दीं और रास्ते में बारी-बारी से उन्होंने डोली को कंधा दिया। ये लोग सोमवार दोपहर को बदियाकोट पहुंचे। वहां से 65 किमी दूर जिला मुख्यालय वाहन से घायल को लेकर आए। सोमवार शाम सात बजे खिलाफ को जिला अस्पताल लाया गया। उसके सिर समेत तमाम हिस्सों में चोट थी। हालत में सुधार होने पर परिजन उसे घर ले गए हैं।
समड़ड (बोरबलड़ा) गांव में करीब 60-70 लोग रहते हैं। गांव के अधिकतर युवा हल्द्वानी, बागेश्वर और भराड़ी आदि क्षेत्रों में छोटी-मोटी नौकरी कर रहे हैं। बच्चे बदियाकोट में रहकर पढ़ाई करते हैं। गांव में चंद पुरुष, बुजुर्ग और महिलाएं हैं। इसी के चलते घायल खिलाफ सिंह को बदियाकोट तक लाने के लिए गांव की महिलाओं को भी डोली को कंधा देना पड़ा।
गांव के दया देवी, प्रीति देव, चंद्रा देवी, सावित्री देवी, बबीता दानू, हरीश सिंह, गंगा सिंह, दयाल सिंह, अर्जुन सिंह खिलाफ सिंह को 25 किमी डोली में ढोकर बदियाकोट तक पहुंचाया। बदियाकोट निवासी नरेंद्र दानू ने बताया कि सड़क न होने से इलाके के लोगों के सामने आए दिन इस तरह की दिक्कत आती है। गांव से पलायन तो नहीं है लेकिन युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ा है।