वर्ष 1980 में नंदासैंण में शांता देवी के नेतृत्व में महिलाओं के बांज बचाओ अभियान को कौन भुला सकता है। इसी आंदोलन का प्रतिफल है कि यहां सैकड़ों एकड़ भूमि में बांज, बुरांश का जंगल लहलहा रहा है।
महिलाएं करती हैं देखरेख
लंगासू की पूर्व वन पंचायत सरपंच बीना सती का कहना है कि महिलाओं के देखरेख और मेहनत से उनके गांव का जंगल विकसित हो रहा है। अवैध कटान करते हुए अगर कोई पकड़ा गया तो, उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना किया जाता है।
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खैनोली महिला मंगल दल की सचिव बबीता देवी का कहना है कि उनके गांव में वर्षभर में सिर्फ 20 दिन के लिए जंगल को खोला जाता है। प्रत्येक तीसरे दिन महिलाओं का दल जंगल का जायजा लेता है।
महिला मंगल दल ने किया था वृक्षारोपण
ग्राम पंचायत लंगासू के महिला मंगल दल ने 20 वर्ष पहले बांज के पौधों का रोपण किया, जो करीब 40 नाली से अधिक क्षेत्र में फैल गया है।
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ग्राम पंचायत पुडियाणी में वर्ष 1980 में शाकंबरी देवी के नेतृत्व में महिला मंगल दल ने 42 एकड़ गांव की भूमि पर जो पौधारोपण किया था, वह सघन वन बन चुका है। ग्रामीणों के मवेशियों के लिए चारापत्ती का गुजारा भी इसी वन से होता है।
जंगल बचाने को दी शहादत
गौचर क्षेत्र के बणसोली की 14 वर्षीय वीर बाला बीना ने 12 मई 1999 को आग से बचाने में सराहनीय प्रयास किया। लेकिन आग की लपटों में घिरने से उसकी मौत हो गई।