रुद्रप्रयाग में वृद्धा की मौत सवालों के घेरे में आ गई है। गुलदार के हमले के दावे पर वन विभाग ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों की मानें तो ऊखीमठ तहसील की ग्राम पंचायत डांगी में 75 वर्षीय वृद्धा की मौत की वजह गुलदार का हमला है। हालांकि उन्होंने इसकी सूचना संबंधित महकमों को नहीं दी।
इसके बावजूद वन विभाग और राजस्व विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने से पहले ही परिजनों ने शव का दाह संस्कार कर दिया। शव जलाने की जल्दबाजी और पोस्टमार्टम नही होने से वन विभाग मामले को संदिग्ध मान रहा है।
शौच के लिए गई थी महिला
जानकारी के अनुसार, डांगी गांव से किसी ग्रामीण ने तहसील कार्यालय में सूचना दी कि शुक्रवार तड़के पांच से छह बजे के बीच गुलदार ने स्व. सैन सिंह की पत्नी जसमति देवी को मार डाला है। उसका सिर और पैर गायब है।
तहसील से इसकी सूचना वन विभाग को भी दी गई। जब तक दोनों विभागों की टीम गांव पहुंची, तब तक परिजन शव को श्मशान घाट ले गए थे। अधिकारियों ने परिजनों को फोन कर शव जलाने से पहले पोस्टमार्टम कराने की बात कही, लेकिन परिजन नहीं माने और उन्होंने शव जला दिया।
गुलदार के हमले पर वन विभाग ने उठाए सवाल
राजस्व उप निरीक्षक डीएस कठैत ने बताया कि उन्होंने मौका मुआयना किया है। घर से आगे खेतों में धान की फसल दबी हुई है। ऐसे में लगता है कि कोई जानवर उसे घसीट कर ले गया होगा।
मृतका के बेटे हुकुम सिंह ने लिखकर दिया है कि उन्होंने वन व राजस्व विभाग को इस घटना की सूचना नहीं दी। मामला संदिग्ध नहीं था, इसलिए दाह संस्कार कर दिया। वह कोई भी वैधानिक कार्रवाई नहीं चाहता है।
राजस्व उप निरीक्षक ने बताया कि परिजनों का कहना है कि वृद्धा को गुलदार ने मारा है, लेकिन बिना पोस्टमार्टम के यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। इधर, वन विभाग को ग्रामीणों की कहानी पर विश्वास नहीं है। एसडीओ अजय शर्मा ने बताया कि टीम ने ना तो शव देखा है और ना ही शव का पोस्टमार्टम हुआ है।
किसी भी अनुरेचल डेथ में क्लेम के लिए पीएम रिपोर्ट जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि गांव में 20-21 लोगों से घटना के बारे में पूछा गया, तो किसी ने भी शव देखने की बात नहीं की। सबने सुनी सुनाई बात कही। फसल दबी तो है, लेकिन कहीं भी खून की बूंद नहीं मिली। बेहतर होता कि परिजन टीम को शव देखने देते और उसका पोस्टमार्टम करने देते। तब असलियत का पता चलता।