चीन से कैलास मानसरोवर यात्रा के नए मार्ग पर समझौता होने के चलते अब तीर्थयात्री आसानी से कैलास तक पहुंच सकेंगे।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन ने नाथू ला दर्रे से वैकल्पिक रूट (मोटर मार्ग) खोलने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बृहस्पतिवार को इस बारे में समझौता हुआ। अभी तक यह यात्रा उत्तराखंड और नेपाल के दुर्गम रास्तों से होकर जाती थी।
नए समझौता मार्ग के शुरू होने से अब तीर्थयात्रियों को 22 दिनों के कठिन और दुर्गम रास्तों के बजाय गाड़ी में बैठकर कैलास तक जा सकेंगे। ऐसा होने से अधिक संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए जा सकेंगे। अभी तक एक सीजन में अधिक से अधिक लगभग 900 के करीब यात्री कैलास यात्रा पर जा पाते हैं।
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वहीं नए यात्रा मार्ग से यात्रा शुरू होने से उत्तराखंड की धार्मिक आस्थाओं के साथ अर्थव्यवस्था पर चोट पहुंचेगी। अभी तक राज्य के लिपुलेख दर्रे का एकमात्र रूट होने से वैकल्पिक मार्ग का राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मंच पर विरोध हो रहा है।
उत्तराखंड में हो रहा नए मार्ग का विरोध
ब्रिक्स सम्मेलन से वैकल्पिक मार्ग की सुगबुगाहट भर से उत्तराखंड में विरोध की फूटी चिंगारी को अब नए वैकल्पिक मार्ग पर समझौते ने हवा दे दी है। सम्मेलन के तुरंत बाद सीएम हरीश रावत ने पीएम को धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वैकल्पिक मार्ग खुलने का विरोध दिल्ली तक सुनाई देगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए वर्ष 1981 के बाद केवल लिपुलेख पास ही खोला गया है। इस रूट को बेहद दुर्गम माना जाता है, जिसकी दुश्वारियां जून 2013 में आई आपदा के बाद और बढ़ गई हैं। हालांकि आपदा के बावजूद इस वर्ष चली यात्रा ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए।
मार्ग के बेहद लंबा होने के साथ कई पड़ाव पैदल यात्रा पर होने से पीएम नरेंद्र मोदी ने वैकल्पिक मार्ग की बात कही थी।
यह होगा कैलास का नया रूट
नाथू ला दर्रे (सिक्कम) को यात्रा के लिए खोलने पर अब चीन की सहमति से कैलाश मानसरोवर के मुहाने तक वाहन से पहुंचा जा सकेगा। नाथू ला के अगले वर्ष शुरू होने से तीर्थयात्री लिपुलेख के दुर्गम मार्ग के जोखिम के बदले नए रूट से जाएंगे। जिससे यात्रा से जुड़ी उत्तराखंड विशेषतौर पर कुमाऊं की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगी।
यात्रा के दूसरे मार्ग से जाने से इस मार्ग पर रहने वाले व्यापारियों का भी व्यापार बंद हो जाएगा।
प्रदेश सरकार के अलावा कांग्रेस सांसद महेंद्र सिंह माहरा वैकल्पिक मार्ग का विरोध जता चुके हैं। माहारा ने लिपुलेख के अलावा कोई अन्य रूट खोलने पर संसद के सामने धरने पर बैठने तक की चेतावनी दी है। इस वर्ष रिकार्ड 910 यात्री लिपुलेख दर्रे से मानसरोवर के लिए गए हैं।
पुराने मार्ग का है धार्मिक महत्व
कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने के लिए भारत तिब्बत के बीच 12 दर्रे हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड से सिक्कम तक फैले इन दर्रों में धार्मिक आस्थाएं लिपुलेख से होने वाले मार्ग से जुड़ी हैं। कुमाऊं से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा का जिक्र सकनपुराण के मानसखंड में है। लिपुलेख रूट से छोटा कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन हो सकते हैं, जिनका यात्रा की आस्थाओं में महत्व है।
उत्तराखंड के तीर्थाटन को नुकसान मानसरोवर यात्रा सीधे तौर पर तीर्थाटन से जुड़ी हुई है। काठगोदाम से कैलाश पर्वत तक पहुंचने के लिए 22 पड़ाव हैं। इसके तहत 10 पड़ाव उत्तराखंड में हैं जो स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए हैं। यात्रा वर्ष 2013 में आई आपदा से यात्रा रूट पर हुई तबाही ने यात्रा पर सवाल खड़े कर दिए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुईं। यात्रा से जुड़ी अर्थव्यवस्था के लिए हिमाचल प्रदेश और लद्दाख भी अपने रूट खोलने की मांग करता रहा है।
उत्तराखंड सीएम ने फैसले पर जताई नाखुशी
फैसला तकलीफदायक है। इस फैसले से सिर्फ उत्तराखंड के हितों पर नहीं है बल्कि परंपरागत सांस्कृतिक भावनाओं पर भी चोट लगी है। चीन से इस मार्ग से व्यापारिक समझौता होता तो कतई दिक्कत नहीं थी। मैं समझता हूं केंद्र सरकार गलती में सुधार कर उत्तराखंड से कैलाश यात्रा को और बेहतर बनाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराएगी ताकि मार्ग ठीक हो।
हम फैसले से घबराए भी नहीं हैं। धर्मावलंबियों को चाहिए कि इस मुद्दे पर खुलकर बोलें। उत्तराखंड के सभी सांसदों को भी चाहिए केंद्र सरकार से बात करें। -हरीश रावत, मुख्यमंत्री
सीएम ने समझाया मार्ग का महत्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर उत्तराखंड से होकर कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रा मार्ग के महत्व को समझाया। उनका कहना है कि शास्त्रों में बाकयदा इस मार्ग का वर्णन है। भगवान शिव इस मार्ग से मां नंदा से मिलने आए थे। इसी मार्ग में छोटा कैलाश और ऊं पर्वत पड़ते हैं। राहुल सांकृत्यान ने भी ग्रंथों में इसी मार्ग का जिक्र किया है। कैलाश के लिए यह मार्ग सदियों पुरानी आस्था का प्रतीक रहा है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत को गलतफहमी हो गई है। उत्तराखंड से मानसरोवर यात्रा मार्ग बदस्तूर जारी है। यदि एक मार्ग सिक्किम से खुल जाता है तो इसमें क्या हर्ज है और हरीश को इससे क्या परेशानी है। जितने मार्ग खुलेंगे यात्रा उतनी ही सुगम और सुविधाजनक हो। -रमेश पोखरियाल निशंक, हरिद्वार से भाजपा सांसद।
उत्तराखंड का परंपरागत मार्ग यथावत है, सिक्किम तो वैकल्पिक मार्ग के रूप में खोला जा रहा है। इस मुद्दे पर किसी को राजनीति नहीं करनी चाहिए। यात्रियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर वैकल्पिक मार्गों की संख्या बढ़ना सुविधाजनक है। इस मुद्दे पर किसी तरह की पैरवी करने का कोई औचित्य नहीं है। -अजय टम्टा, अल्मोड़ा से भाजपा सांसद।