जिस पर परिजनों ने तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस अस्पताल में तीनों नवजातों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत शुरू किया गया। डॉक्टरों के अनुसार दोपहर दो बजे के करीब बच्ची की मौत हो गई, जबकि दोनों बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है। आक्रोशित परिजनों का कहना है कि यदि दून महिला अस्पताल में वेंटीलेटर मिल जाता तो बेटी की जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं है। इसलिए तीनों शिशुओं की नाजुक हालत के चलते उन्हें महंत इंदिरेश अस्पताल रेफर किया गया है।
दून अस्पताल के एमएस डॉ. केके टम्टा का कहना है कि वेंटीलेटर बार-बार खराब हो रहा था। नया वेंटीलेटर लगाने के लिए कंपनी को फरवरी में डिमांड भेजी हुई है। दोबारा रिमाइंडर भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही वेंटीलेटर आ जाएगा।