प्लांट से गैस सिलेंडर से भरे एक दर्जन ट्रक पेट्रोल पंप और हाईवे पर खड़े थे। प्लांट के अंदर तीन बुलेट गैस टैंक स्थापित हैं। वे गैस से भरे हुए थे। एक टैंक में लगभग 60 से 70 टन के करीब गैस आती है। यानी तीनों टैंकरों में लगभग 190 टन गैस थी। स्टोर के अलावा हजारों की गैस के सिलेंडर भरे रहते हैं।
लोगों का कहना है कि हादसा चालक की लापरवाही से हुआ है। प्लांट के पास सुरेंद्र सती, कैप्टन राजेंद्र सती, भाष्कर भट्ट के अलावा कई लोगों के मकान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की कई घटनाएं हो चुकी हैं मगर प्रबंधन तंत्र ने संज्ञान नहीं लेता। यह भी आरोप लगाया कि गैस भरे टैंकर चालक रात में नशे में रहते हैं। अपने टैंकरों को हाईवे पर ही पार्क कर देते हैं। केबिन में मच्छरों से बचने के लिए कॉईल जलाकर सो जाते हैं।
वाहनों को खड़ा करने के लिए प्लांट के अंदर पार्किंग है लेकिन चालक अपनी मर्जी और अपनी सुविधा के अनुसार वाहनों को हाईवे किनारे ही पार्क करते हैं। मामले की जांच की जा रही है जो भी दोषी होगा उसके खिलार्फ कार्रवाई की जाएगी।
-अनुराग सिंहा, वरिष्ठ प्लांट प्रबंधक इंडेन गैस बाटलिंग प्लांट
वरिष्ठ प्रबंधक को कोतवाली बुलाकर हिदायत दी गई है कि राष्ट्रीय राज मार्ग पर वाहनों को पार्क किए जाने के बाद यदि ऐसी घटना फिर होती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रबंध तंत्र की होगी।
-योगेश चंद्र उपाध्याय कोतवाल लालकुआं