वहीं अस्पताल में तैनात डॉक्टर मोनिका श्रीवास्तव ने मामले में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही होने से इनकार करते हुए कहा कि महिला को प्रसव पीड़ा के बहुत देर बाद अस्पताल लाया गया। रात में ही प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी तो उसे तभी अस्पताल ले आना चाहिए था।
नगर के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी है। जिसका खामियाजा नगर और आसपास के ग्रामीणों समेत बाहरी पर्यटकों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में तीन चिकित्सकों की नियुक्ति है, जिनमें से एक चिकित्सक लंबे समय से देहरादून में स्वास्थ्य महानिदेशक के कार्यालय में अटैच हैं, दूसरी डॉक्टर इन दिनों अवकाश पर हैं। ऐसे में इन दिनों केवल एक ही चिकित्सक पर सारी जिम्मेदारी है। अस्पताल में अन्य स्वास्थ्यकर्मियों सहित अन्य कर्मचारियों की भारी कमी है।
मोटर मार्ग से वंचित है खट्टा पानी तुनेटा
मसूरी से करीब चार किमी दूरी पर स्थित खट्टा पानी तुनेटा गांव आज भी मोटर मार्ग से वंचित है। यहां केवल पगडंडी से ही पहुंचा जा सकता है। वहां कोई चोपहिया वाहन नहीं जा सकता, जिस कारण विकट परिस्थितियों में ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि गांव तक सड़क होती तो महिला को प्रसव पीड़ा होने पर रात गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ता। सुबह होने पर बाइक पर पीड़िता को अस्पताल पहुंचाया गया।