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तीन पर एक 'फ्री' मिला तो पूर्णिमा को मिले चार 'चांद'

Thu, 17 Jul 2014 03:32 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून के मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों की मेहनत से कोटद्वार की पूर्णिमा ध्यानी ने चार बच्चों को जन्म तो दे दिया, लेकिन ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों को भी इस बात का पता नहीं था।
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डॉक्टरों ने तो तीन बच्चे मानकर सीजेरियन ऑपरेशन की तैयारी की थी। चौथा बच्चा देख वे हैरान तो हुए ही, बच्चे और मां की सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ गई।

हालांकि, तमाम मुश्किलों के बावजूद ऑपरेशन सफल रहा। अब मां और चारों बच्चे स्वस्थ, सामान्य हैं। यह अनुभव साझा किया मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने।

तत्काल टीम बनाकर कराई सीजेरियन डिलीवरी

बुधवार को मैक्स अस्पताल प्रबंधन पूर्णिमा ध्यानी, उनके परिजनों और चारों बच्चों को मीडया के सामने लाया। प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लूना पंत ने बताया कि पूर्णिमा को गर्भावस्था के 33वें हफ्ते (आठवें माह) में अस्पताल में लाया गया था।

उसे प्रसव पीड़ा होने लगी थी, लेकिन अपरिपक्व गर्भ के चलते बच्चों को जन्म दिलाना मुश्किल काम था। डॉ. पंत के मुताबिक तीन माह के अल्ट्रासाउंड में तीन बच्चों का पता लग जाता है।

लेकिन पूर्णिमा की स्थिति ऐसी थी कि अल्ट्रासाउंड नहीं किया जा सकता था। ऐसे में तत्काल टीम बनाकर सीजेरियन डिलीवरी की तैयारी की गई।

डॉ. पंत ने बताया कि आपरेशन टेबल पर पूर्णिमा को ले जाने तक भी वह यही मानकर चल रही थी कि गर्भ में तीन शिशु हैं। लेकिन जब तीन बच्चे निकाल लिए गए तो चौथा सामने आया।

उसे देख टीम चौंक गई। लेकिन, फिर सबने साथ दिया और चौथे बच्चे को भी सकुशल जन्म दिलाया। चारों बच्चे डेढ़-डेढ़ किलो के थे और सभी जन्म के तुरंत बाद रोने लगे थे। बताया कि पूर्णिमा को चार बच्चों की जानकारी दी गई तो वह बहुत खुश हुई।

बेमिसाल रहा यह अनुभव

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित श्रीवास्तव ने बताया कि जन्म के समय सभी बच्चों को सांस की परेशानी हो रही थी। समय पूर्व प्रसव में फेफड़े और लीवर देरी से विकसित होते हैं।

इससे पीलिया होने का डर रहता है। ऐसे में चारों बच्चों को वेंटिलेटर पर रखा गया। फेफड़ों के विकास के लिए ट्यूब डालकर दवा दी गई।

21 दिन तक आक्सीजन पर रखने के बाद चारों बच्चे स्वस्थ हो गए। इसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया। दोनों डॉक्टरों ने कहा कि यह अनुभव बेमिसाल रहा।

इसने जहां डॉक्टरी के पेशे में सामने आने वाली अनोखी चुनौतियों से रूबरू कराया वहीं मुश्किलों से जूझने का हौसला भी दिया।
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डॉक्टर ने दी पूर्णिमा को सलाह

- बच्चों के दूध पीने और सोने का समय तय करने की कोशिश करें
- स्तनपान और डायपर की आदतों के लिए सही प्रक्रिया अपनाएं
- अपने भोजन का भी पूरा ख्याल रखें, स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें
- बच्चों की जरूरत की चीजें जैसे दूध, पाउडर, डायपर हमेशा साथ रखें
- बच्चों के सोते ही खुद भी सो जाएं, हमेशा मुस्कुराते रहें
- डॉक्टरों से अपना, बच्चों का नियमित चेकअप कराते रहें
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